बांग्लादेश के खुलना स्टेशन के पास नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के भित्ति-चित्र पर पोती गई काली स्याही, स्थानीय लोगों में आक्रोश
बांग्लादेश के खुलना स्टेशन के पास नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के भित्ति-चित्र पर पोती गई काली स्याही, स्थानीय लोगों में आक्रोश
खुलना:
बांग्लादेश के खुलना रेलवे स्टेशन के पास दीवारों पर उकेरे गए नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के भित्ति-चित्र (म्यूरल) के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उपद्रवियों ने गुरुदेव के म्यूरल पर काली स्याही पोत दी है, जिससे स्थानीय लोगों और सांस्कृतिक प्रेमियों में भारी आक्रोश है। खुलना सदर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी लुकमान हुसैन ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शुक्रवार दोपहर इस संबंध में सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे से पहले हुई घटना
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शहर के प्रस्तावित दौरे से पहले खुलना सिटी कॉरपोरेशन (KCC) की पहल पर ओल्ड जेसोर रोड के किनारे ये भित्ति-चित्र बनवाए गए थे। इन दीवारों पर जुलाई 2024 के जन-विद्रोह, सुंदरबन, ऐतिहासिक ‘साठ गुंबद मस्जिद’ और जूट उद्योग के साथ-साथ रवींद्रनाथ टैगोर, काजी नजरुल इस्लाम, फकीर लालन शाह, एस.एम. सुल्तान, खालिदा जिया, जियाउर रहमान और माइकल मधुसूदन दत्त जैसी महान हस्तियों के चित्र उकेरे गए थे। हालांकि, इनमें से विशेष रूप से केवल रवींद्रनाथ टैगोर के चित्र को ही काली स्याही से निशाना बनाया गया।
सांस्कृतिक संगठनों और नेताओं की कड़ी निंदा
इस घटना की चौतरफा निंदा हो रही है। KCC के प्रशासक नजरुल इस्लाम मंजू ने इस हरकत को संकीर्ण सोच और बीमार मानसिकता का परिचायक बताया है। वहीं, सांस्कृतिक संगठन ‘नाट्यलोक’ के महासचिव शरीफुल इस्लाम सलीम ने आशंका जताई है कि इसके पीछे किसी संगठित समूह का हाथ है, जो युवाओं को गुमराह कर ऐसी शर्मनाक हरकतें करवा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह मामला सिर्फ टैगोर तक सीमित नहीं रहेगा और उपद्रवी अन्य महान हस्तियों को भी निशाना बना सकते हैं।
गौरतलब है कि लगभग एक महीने पहले ढाका में बांग्लादेश शिल्पकला अकादमी के बाहर भी टैगोर के भित्ति-चित्र को इसी तरह काली स्याही से खराब किया गया था। उस घटना के बाद देश के कम से कम 37 प्रमुख नागरिकों ने गहरी चिंता जताते हुए चेतावनी दी थी कि इस तरह की बढ़ती घटनाएं धार्मिक चरमपंथियों का हौसला बढ़ा सकती हैं और देश में सांप्रदायिक तनाव को गहरा कर सकती हैं।

