त्योहारों पर महंगे हवाई किराए का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा—”हवाई यात्रा मत कीजिए”; सरकार ने नोटिफाई किए नए नियम
त्योहारों पर महंगे हवाई किराए का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा—”हवाई यात्रा मत कीजिए”; सरकार ने नोटिफाई किए नए नियम
त्योहारों के सीजन में विमान कंपनियों द्वारा किराए में 700% तक की भारी बढ़ोतरी का मामला सोमवार (2 नवंबर 2026) को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में उठा। इस दौरान जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “ठीक है, हवाई यात्रा मत कीजिए।”
सुप्रीम कोर्ट में महंगे हवाई किराए से जुड़ा यह मामला पहले से ही विचाराधीन है, जिसकी अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को तय की गई है। कोर्ट ने तब तक सरकार को नए नियम अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था। हालांकि सरकार ने सोमवार को ही हवाई किराए से जुड़े नए नियमों को नोटिफाई (अधिसूचित) कर दिया है, फिर भी यह मामला कोर्ट में उठाया गया।
क्या है पूरा मामला और कोर्ट की सुनवाई?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने टिकटों के दामों में बेतहाशा वृद्धि को संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन बताते हुए इसे एक जरूरी सेवा करार दिया था। वकील की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट लहजे में कहा कि हवाई यात्रा करना कोई अनिवार्यता नहीं है और इसके बाद अपने स्टाफ से अगले मामले को सुनने के लिए कहा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट महंगे हवाई किराए के मुद्दे पर पहले से ही सरकार के रुख को लेकर सख्त नजर आ रहा है और 16 नवंबर को इस पर विस्तृत सुनवाई होगी।
सरकार द्वारा जारी नए नियम: ‘भारतीय वायुयान नियम 2026’
बढ़ते कच्चे तेल और जेट फ्यूल (ATF) की कीमतों के चलते आसमान छूते हवाई किरायों पर लगाम कसने के लिए सरकार ने नए नियम लागू किए हैं:
आपात स्थिति में दखल का अधिकार: नए नियमों के तहत, यदि कोई बड़ी आपात स्थिति (असाधारण परिस्थिति) आती है और जनहित में जरूरी लगता है, तो सरकार एयरलाइंस को टिकटों के दाम तय करने या नियंत्रित करने का लिखित आदेश दे सकती है। यह व्यवस्था सीमित समय के लिए होगी।
किराए की पारदर्शिता: नियम 192 के अनुसार, नियमित उड़ानें संचालित करने वाली एयरलाइंस को अपने किराए की पूरी जानकारी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को देनी होगी।
वेबसाइट पर स्पष्ट जानकारी: एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट पर टिकट के दाम साफ-सुथरे तरीके से प्रदर्शित करने होंगे। बुकिंग के समय यात्री को बेस किराया, टैक्स, अन्य फीस और कैंसिलेशन चार्ज का पूरा ब्रेकअप अलग-अलग दिखाना अनिवार्य होगा। DGCA इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखेगा।
गौरतलब है कि भारत में वर्ष 1994 से एयरलाइंस को अपने किराए खुद तय करने की खुली छूट दी गई थी, जो मांग और बाजार के खर्चों पर आधारित होते हैं। हालांकि, अब नए नियमों के जरिए सरकार ने आपातकालीन स्थितियों में कीमतों को नियंत्रित करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा है।

