केदारनाथ धाम में 13 साल बाद दिखा बर्फबारी का पुराना नजारा, शीतकाल से पहले बर्फ की चादर में लिपटी केदारघाटी
केदारनाथ धाम में 13 साल बाद दिखा बर्फबारी का पुराना नजारा, शीतकाल से पहले बर्फ की चादर में लिपटी केदारघाटी
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम में 13 साल बाद शीतकाल की शुरुआत से ठीक पहले बर्फबारी का विहंगम दृश्य देखने को मिल रहा है। वर्ष 2013 की भीषण आपदा के बाद कपाट बंद होने के समय धाम में इस तरह की बर्फबारी बेहद कम देखी गई थी। समुद्र तल से 11,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित धाम में शुरू हुई इस शीतकालीन बर्फबारी ने स्थानीय लोगों और तीर्थपुरोहितों के चेहरे पर खुशी ला दी है।
इस बीच, रुद्रप्रयाग जनपद पुलिस ने सोशल मीडिया पर केदारघाटी में बर्फबारी का एक मनमोहक वीडियो साझा किया है। यह वीडियो बाबा केदारनाथ के रक्षक माने जाने वाले भुकुंट भैरवनाथ जी के मंदिर का है, जिसमें पूरी घाटी बर्फ की सफेद चादर ओढ़े नजर आ रही है।
भुकुंट भैरवनाथ और चारों धामों के कपाट बंद होने की तिथियां
शीतकाल के लिए उत्तराखंड के प्रमुख धामों और मंदिरों के कपाट बंद होने का कार्यक्रम इस प्रकार है:
भुकुंट भैरवनाथ मंदिर: 7 नवंबर 2026
गंगोत्री धाम: 10 नवंबर 2026
यमुनोत्री धाम: 11 नवंबर 2026
केदारनाथ धाम: 11 नवंबर 2026 (कपाट बंद होने में अब केवल 9 दिन शेष हैं)
बदरीनाथ धाम: 16 नवंबर 2026
तीर्थपुरोहितों ने पुरानी यादें कीं ताजा
कपाट बंद होने से ठीक पहले हुई बर्फबारी से तीर्थपुरोहितों में खासा उत्साह है:
वरिष्ठ तीर्थपुरोहित एवं केदारसभा के पूर्व अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने बताया कि आपदा से पहले कपाट बंदी के समय कई बार धाम में दो फीट तक बर्फ जम जाती थी और कभी-कभी नीचे रामबाड़ा तक बर्फ दिखाई देती थी।
केदारसभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी और तीर्थपुरोहित उमेश पोस्ती ने इस समय हुई बर्फबारी को शुभ संकेत मानते हुए कहा कि इसने पुरानी यादें ताजा कर दी हैं और आने वाले शीतकाल में भी अच्छी बर्फबारी की उम्मीद जगाई है।
निर्माण कार्यों के बाद बदला था बर्फबारी का पैटर्न
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में केदारनाथ में रिकॉर्ड बर्फबारी हुई थी और 2013 में कपाट खुलने के दौरान धाम में 12 फीट तक बर्फ मौजूद थी। हालांकि, 2014 और 2022 के बाद के वर्षों में धाम के मुख्य परिसर में बर्फबारी का क्रम थोड़ा बिगड़ गया था और बर्फ केवल ऊंची पहाड़ियों तक ही सीमित रह जाती थी। ऐसे में 13 साल बाद कपाट बंदी से ठीक पहले धाम परिसर में बर्फ की मोटी चादर जमना एक अद्भुत नजारा पेश कर रहा है।

