अमेरिका में मध्यावधि (मिडटर्म) चुनाव: राष्ट्रपति के कार्यकाल का लिटमस टेस्ट और अमेरिकी इतिहास के तीन बड़े सियासी टर्निंग पॉइंट
अमेरिका में मध्यावधि (मिडटर्म) चुनाव: राष्ट्रपति के कार्यकाल का लिटमस टेस्ट और अमेरिकी इतिहास के तीन बड़े सियासी टर्निंग पॉइंट
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) को अमेरिकी राजनीति का एक बेहद अहम मोड़ माना जाता है। हालांकि इन चुनावों में सीधे तौर पर राष्ट्रपति की कुर्सी नहीं बदलती, लेकिन यह चुनाव राष्ट्रपति के कामकाज के लिए जनता का लिटमस टेस्ट और उनकी नीतियों का पैमाना साबित होते हैं। अमेरिकी इतिहास में ऐसे कई मौके आए हैं जब मिडटर्म चुनावों के नतीजों ने राष्ट्रपति की सियासी ताकत, नीतियों और व्हाइट हाउस के अगले दो सालों के एजेंडे को पूरी तरह बदलकर रख दिया।
आइए नजर डालते हैं अमेरिकी इतिहास के उन तीन बड़े उदाहरणों पर, जिन्होंने मध्यावधि चुनावों के बाद देश की राजनीतिक दिशा बदल दी:
1. वर्ष 1994: बिल क्लिंटन के कार्यकाल का बड़ा झटका
पृष्ठभूमि: राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल के शुरुआती दो वर्षों में अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सुधार योजनाओं को लेकर जनता में असंतोष बढ़ रहा था।
नतीजे: न्यूट गिंगरिच के नेतृत्व में रिपब्लिकन पार्टी ने ‘कॉन्ट्रैक्ट विद अमेरिका’ एजेंडे के तहत चुनाव लड़ा और प्रतिनिधि सभा में 54 तथा सीनेट में 8 सीटों का भारी इजाफा किया। करीब चार दशक बाद कांग्रेस के दोनों सदनों पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण हो गया।
असर: राष्ट्रपति और रिपब्लिकन बहुमत के बीच बजट को लेकर ऐसा टकराव बढ़ा कि नवंबर और दिसंबर 1995 में अमेरिकी सरकार को दो बार कामकाज बंद (শटडाउन) करना पड़ा। अंततः दोनों पक्षों को समझौते की राह चुननी पड़ी।
2. वर्ष 2006: जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और इराक युद्ध की नाराजगी
पृष्ठभूमि: राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल के दौरान इराक युद्ध और अमेरिकी सैन्य अभियान की दिशा को लेकर जनता में भारी नाराजगी थी।
नतीजे: 7 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में 30 और सीनेट में 6 सीटें जीतकर रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में बहुमत से बेदखल कर दिया। नैन्सी पेलोसी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष बनीं।
असर: चुनाव के ठीक अगले दिन रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफेल्ड ने अपने पद से हटने का ऐलान किया और उनकी जगह रॉबर्ट गेट्स को नियुक्त किया गया। नई कांग्रेस ने बुश प्रशासन की नीतियों पर जवाबदेही और निगरानी बढ़ा दी।
3. वर्ष 2010: बराक ओबामा की ‘शेलैकिंग’ (बड़ी हार)
पृष्ठभूमि: आर्थिक संकट के बाद रोजगार के मुद्दों और ‘अफोर्डेबल केयर एक्ट’ (ओबामाकेयर) को लेकर तीखी राजनीतिक बहस छिड़ी हुई थी। टी पार्टी आंदोलन ने भी इसके खिलाफ माहौल तैयार किया था।
नतीजे: डेमोक्रेटिक पार्टी को प्रतिनिधि सभा में 63 सीटों का भारी नुकसान उठाना पड़ा और सदन पर रिपब्लिकन पार्टी का कब्जा हो गया। सीनेट में भी पार्टी ने 6 सीटें गंवाईं।
असर: राष्ट्रपति ओबामा के विधायी एजेंडे को तगड़ा झटका लगा। रिपब्लिकन बहुमत वाली प्रतिनिधि सभा ने ओबामाकेयर को पलटने की कोशिशों के साथ प्रशासन पर शिकंजा कसा, जिससे राष्ट्रपति के लिए नए कानून पास कराना बेहद कठिन हो गया।
क्यों अहम होते हैं मिडटर्म चुनाव?
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव महज कांग्रेस की सीटों का गणित नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्रपति के अब तक के कामकाज पर जनता की मुहर या नाराजगी का प्रतीक होते हैं। इतिहास गवाह है कि इन चुनावों के नतीजे कभी बजट पर गतिरोध, कभी युद्ध नीतियों पर तीखे सवाल तो कभी घरेलू सुधारों पर ब्रेक का कारण बनते हैं। यही वजह है कि अमेरिकी राजनीति में इन चुनावों का विशेष महत्व होता है।

