Tuesday, October 27, 2026
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करवा चौथ 2026: 29 अक्टूबर को रखा जाएगा निर्जला व्रत; जानें किन 7 स्वास्थ्य स्थितियों में महिलाओं को बरतनी चाहिए सावधानी

करवा चौथ 2026: 29 अक्टूबर को रखा जाएगा निर्जला व्रत; जानें किन 7 स्वास्थ्य स्थितियों में महिलाओं को बरतनी चाहिए सावधानी

​सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद पवित्र और खास माना जाने वाला करवा चौथ का व्रत इस साल 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के साथ सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत (बिना अन्न और जल के) रखती हैं।

​हालांकि, धार्मिक आस्था और परंपराओं के साथ-साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ विशेष शारीरिक और चिकित्सीय स्थितियों में निर्जला व्रत रखना सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

​किन महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए (या डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए)?

​1. गर्भवती महिलाएं (Pregnant Women):

गर्भावस्था के दौरान मां और शिशु दोनों को पर्याप्त पोषण और तरल पदार्थों (Hydration) की निरंतर आवश्यकता होती है। लंबे समय तक निर्जला रहने से डिहाइड्रेशन, सिर चकराना और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को व्रत रखने से पूर्व अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

​2. स्तनपान कराने वाली माताएं (Lactating Mothers):

नवजात या छोटे बच्चों को दूध पिलाने वाली माताओं के शरीर में तरल पदार्थों और ऊर्जा का स्तर बनाए रखना आवश्यक होता है। पानी न पीने से डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और थकान हो सकती है, जिसका असर दूध के निर्माण पर भी पड़ सकता है।

​3. डायबिटीज (मधुमेह) से पीड़ित महिलाएं:

जो महिलाएं इंसुलिन या ब्लड शुगर की दवाएं ले रही हैं, उनके लिए लंबे समय तक खाली पेट रहना खतरनाक हो सकता है। इससे ब्लड शुगर का स्तर अचानक बहुत कम (Hypoglycemia) हो सकता है या अनियंत्रित होकर बढ़ सकता है।

​4. दिल या किडनी संबंधी बीमारियों से ग्रस्त मरीज:

हृदय रोग या किडनी (वृक्क) की समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को खान-पान और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। निर्जला रहने से शरीर में पानी और आवश्यक लवणों का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है।

​5. एनीमिया (खून की कमी) व लो बीपी (Low BP) की समस्या:

जिन महिलाओं को अक्सर चक्कर आते हैं, हीमोग्लोबिन कम है या जिनका ब्लड प्रेशर लो रहता है, वे भोजन-पानी बंद करने पर तेज कमजोरी या बेहोशी की शिकार हो सकती हैं।

​6. मासिक धर्म (Periods) में अत्यधिक परेशानी होने पर:

यदि पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग, पेट में तेज ऐंठन, चक्कर या ज्यादा कमजोरी महसूस हो रही हो, तो शरीर को पर्याप्त पानी और तरल आहार देना बेहद जरूरी है। ऐसी स्थिति में निर्जला व्रत से बचना ही सेहत के हित में है।

​7. कैंसर मरीज या हाल ही में सर्जरी कराने वाली महिलाएं:

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज करा रहीं या सर्जरी/शल्य चिकित्सा से उबर रहीं महिलाओं की इम्युनिटी कमजोर होती है। इन्हें डॉक्टर की अनुमति और सलाह के बिना किसी भी स्थिति में उपवास नहीं रखना चाहिए।

​मुख्य संदेश:

​करवा चौथ का व्रत आस्था और प्रेम का प्रतीक है, लेकिन ‘सेहत ही सबसे बड़ा धन है’। यदि आप इनमें से किसी भी चिकित्सीय स्थिति का सामना कर रही हैं, तो अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार फलाहार/जल ग्रहण करने का विकल्प चुनें या डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद ही व्रत का संकल्प लें।

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