जामिया में छात्र संघ चुनाव पर बनी सहमति, निलंबन और शो-कॉज नोटिस वापस; 15 दिन में चुनाव कराने का फैसला
जामिया में छात्र संघ चुनाव पर बनी सहमति, निलंबन और शो-कॉज नोटिस वापस; 15 दिन में चुनाव कराने का फैसला
दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में पिछले 15 दिनों से जारी छात्र आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव कराने और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ की गई निलंबन संबंधी कार्रवाई वापस लेने पर सहमति जताई है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद मेहताब आलम रिजवी की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान छात्रों को जारी किए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस भी रद्द कर दिए गए हैं।
15 दिन के भीतर चुनाव कराने का फैसला
छात्र लंबे समय से विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित छात्र संघ की बहाली की मांग कर रहे थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2006 में छात्र संघ को भंग कर दिया था। इसे दोबारा बहाल करने और चुनाव की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग को लेकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।
26 अक्टूबर को छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर कुलपति को औपचारिक पत्र सौंपा था। छात्रों की प्रमुख मांग थी कि 20 दिसंबर तक छात्र संघ का संविधान तैयार कर उसे मंजूरी दी जाए और इसके 15 दिनों के भीतर चुनाव की तारीख घोषित की जाए। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों बाद चुनाव कराने पर सहमति जताई है।
छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के नोटिस रद्द
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों को जारी किए गए निलंबन और शो-कॉज नोटिस वापस लेने का फैसला किया है। इसके अलावा, विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी।
छात्रों ने अपनी मांगों में अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने के साथ-साथ भविष्य में प्रदर्शन के संबंध में ऐसी कार्रवाई नहीं करने की मांग भी उठाई थी। उन्होंने मुख्य सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन को अपना संवैधानिक अधिकार बताया था।
समझौते में सार्वजनिक माफी की शर्त भी शामिल
विश्वविद्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, समझौते में प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से विरोध के दौरान दिए गए कथित अपमानजनक बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सार्वजनिक माफी की शर्त भी शामिल है। आदेश के मुताबिक, छात्र प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए माफी मांगेंगे और संबंधित पोस्ट सोशल मीडिया से हटाएंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि इस शर्त को रिकॉर्ड में लिया गया है और इसके पालन पर नजर रखी जाएगी। समझौते पर भूख हड़ताल कर रहे छात्रों और उनके प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।
15 दिन के आंदोलन के बाद निकला समाधान
छात्रों ने लिखित रूप में कहा था कि उनकी मांगों को स्वीकार किए जाने का आदेश मिलते ही वे विरोध प्रदर्शन समाप्त कर देंगे। अब विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चुनाव कराने, नोटिस रद्द करने और सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जांच के लिए समिति गठित करने की घोषणा के बाद आंदोलन को लेकर स्थिति में बदलाव आया है।
छात्रों की प्रमुख मांग विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र संघ की बहाली और चुनाव की स्पष्ट समयसीमा तय करना थी। अब आगे की प्रक्रिया छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने और उसके बाद निर्धारित अवधि में चुनाव कराने पर निर्भर करेगी।

