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कैंसर की दवाएं 90% तक सस्ती! 9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें, 543 ब्रांडों के दाम में कटौती

कैंसर की दवाएं 90% तक सस्ती! 9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें, 543 ब्रांडों के दाम में कटौती

NPPA ने 543 कैंसर दवा ब्रांडों की कीमतों में किया संशोधन, 137 एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तक सीमित; मरीजों को इलाज में मिल सकती है राहत

कैंसर के इलाज पर होने वाला भारी खर्च अब कई मरीजों और उनके परिवारों के लिए कुछ कम हो सकता है। केंद्र सरकार के फैसले के बाद 9 नवंबर 2026 से कैंसर की कई जरूरी दवाएं कम कीमत पर उपलब्ध होने की उम्मीद है। दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती की गई है और कुछ दवाओं के दाम में 80 से 90 प्रतिशत तक कमी बताई जा रही है।

सरकार के तहत काम करने वाली नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कैंसर की 543 दवा ब्रांडों की कीमतों में संशोधन किया है। इसके साथ ही 137 एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करना और मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम करना है।

किन कैंसर दवाओं की कीमतों में हुई कटौती?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई दवाओं की कीमतों में उल्लेखनीय कमी की गई है। प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं:

Anarzole: कीमत 695.76 रुपये से घटाकर 73 रुपये बताई गई है।

Azacytin Injection: कीमत 6,337 रुपये से घटकर 1,495 रुपये हो गई है।

Bevacizab Injection: कीमत 21,767 रुपये से घटाकर 5,930 रुपये की गई है।

Dasanat 20: कीमत 2,812 रुपये से घटकर 1,085 रुपये रह गई है।

Enuta: कीमत 6,578 रुपये से घटाकर 2,232 रुपये बताई गई है।

नई कीमतें 9 नवंबर से लागू होने के बाद संबंधित दवाओं के मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक कीमत दवा के सही ब्रांड, पैक और लागू मूल्य अधिसूचना के अनुसार जांचना जरूरी होगा।

137 एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की सीमा

केंद्र सरकार ने 137 एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है। ट्रेड मार्जिन वह अंतर है जो दवा की खरीद कीमत और आगे की बिक्री कीमत के बीच व्यापारिक स्तर पर रखा जाता है। इस पर सीमा तय करने का मकसद दवाओं की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी को रोकना और मरीजों को उचित दरों पर दवाएं उपलब्ध कराना है।

NPPA द्वारा 543 ब्रांडों की कीमतों में संशोधन को इसी दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है। कैंसर के लंबे इलाज में दवाओं पर लगातार खर्च करना पड़ता है, इसलिए कीमतों में कमी मरीजों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

कैंसर की दवाओं की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाए सवाल

कैंसर की दवाओं की कीमतों और निजी अस्पतालों में उनके शुल्क को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान एक ऐसे मामले का उल्लेख हुआ, जिसमें कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाला एक इंजेक्शन वितरक के स्तर पर करीब 11,000 रुपये में उपलब्ध होने के बावजूद एक निजी अस्पताल में मरीज से उसके लिए 1.30 लाख रुपये वसूले जाने की बात कही गई।

अदालत ने दवा की खरीद कीमत और मरीज से वसूली गई राशि के बीच इतने बड़े अंतर के औचित्य पर सवाल उठाए थे। सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के पास इलाज की शर्तों पर मोलभाव करने की सीमित गुंजाइश होती है और बढ़ी हुई कीमतों का सीधा असर उन पर पड़ता है।

अदालत ने केंद्र सरकार से दवाओं की कीमतों के नियमन और निजी अस्पतालों में लगाए जाने वाले मार्जिन को लेकर सवाल किए थे। इसी संदर्भ में सरकार ने 137 एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन सीमित करने के कदम की जानकारी दी थी।

मरीजों को कितनी राहत मिलेगी?

543 कैंसर दवा ब्रांडों की कीमतों में संशोधन और ट्रेड मार्जिन पर सीमा लगाने से मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि मरीज कौन-सी दवा ले रहा है, उसका ब्रांड और पैक क्या है तथा नई अधिसूचित कीमत कितनी है।

मरीजों और उनके परिजनों को सलाह है कि 9 नवंबर से दवा खरीदते समय नई अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) की जांच करें और जरूरत पड़ने पर फार्मासिस्ट या इलाज कर रहे डॉक्टर से संबंधित दवा की सही कीमत की पुष्टि करें।

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