उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव: लखनऊ में लगे पोस्टर से गरमाई सियासत; कांग्रेस ने दावी 200 सीटें, सपा पर दबाव बनाने की रणनीति पर चर्चा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव: लखनऊ में लगे पोस्टर से गरमाई सियासत; कांग्रेस ने दावी 200 सीटें, सपा पर दबाव बनाने की रणनीति पर चर्चा
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे पर घमासान तेज हो गया है। राजधानी लखनऊ में 25 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस द्वारा लगाए गए एक नए पोस्टर ने राज्य के राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। इस पोस्टर में कांग्रेस ने राज्य की 403 विधानसभा सीटों में से 200 सीटों पर अपना दावा ठोका है।
लखनऊ में लगे पोस्टर और मुख्य बातें:
पोस्टर का स्लोगन: पोस्टर पर लिखा गया है—”200 सीट हक है हमारा, यूपी को है राहुल गांधी पर भरोसा”।
प्रमुख चेहरे: पोस्टर में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’, कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद और यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम की तस्वीरें शामिल हैं।
2024 लोकसभा चुनाव का हवाला: 2024 के लोकसभा चुनावों में मिले बेहतर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अब उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में बराबरी की हिस्सेदारी चाहती है।
175 सीटों से 200 सीटों का सफर (दबाव की राजनीति?):
सपा को सौंपी गई सूची: इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में यह बात सामने आई थी कि कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को 175 सीटों की संभावित सूची सौंपी थी, जिसकी पुष्टि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी अपने रामपुर दौरे के दौरान की थी।
रणनीतिक बदलाव: यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पूर्व में 170 से 200 सीटों की अंदरूनी सूची तैयार होने का संकेत दिया था। लेकिन अब सीधे सड़कों पर पोस्टर जारी कर इस दावे को सार्वजनिक करने को विश्लेषक सपा मुखिया अखिलेश यादव पर मोलभाव का दबाव बनाने की रणनीति मान रहे हैं।
समाजवादी पार्टी (सपा) का रुख:
सपा का रुख और विनेबिलिटी का फॉर्मूला: हालांकि सपा की ओर से कोई आधिकारिक तीखी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सपा कांग्रेस को 50 से 70 सीटों से अधिक देने के मूड में नहीं है।
अखिलेश यादव का बयान: अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया है कि गठबंधन का प्राथमिक लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी को हराना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीटों का आवंटन केवल मांग या दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि प्रत्याशी की ‘जीत की संभावना’ (Winability) को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

