सोशल मीडिया पर छाया वायरल गाना ‘चलड़े चलड़े वाल’: जानिए इसके खूबसूरत बोल, हिंदी अर्थ और पाकिस्तान से इसका कनेक्शन
सोशल मीडिया पर छाया वायरल गाना ‘चलड़े चलड़े वाल’: जानिए इसके खूबसूरत बोल, हिंदी अर्थ और पाकिस्तान से इसका कनेक्शन
इन दिनों सोशल मीडिया पर एक खास गाना हर किसी की जुबान पर चढ़ा हुआ है और इंस्टाग्राम से लेकर तमाम प्लेटफॉर्म्स पर इस पर जमकर रील्स बन रही हैं। इस वायरल गाने के बोल ‘चलड़े चलड़े वाल’ हैं। गायिका शांजी सिबल द्वारा गाए गए इस गाने के एकॉस्टिक वर्जन ने इंटरनेट पर तहलका मचा रखा है। भले ही इसके मूल शब्द तुरंत समझ न आएं, लेकिन इसकी धुन और इसका गहरा अर्थ लोगों को अपना दीवाना बना रहा है। आइए जानते हैं इस लोकप्रिय गाने के हिंदी अर्थ और इसके इतिहास के बारे में।
’चलड़े चलड़े वाल’ गाने का हिंदी मतलब:
इस लोकगीत की सबसे खास बात यह है कि इसमें एक प्रेमी अपनी प्रेमिका की नहीं, बल्कि एक प्रेमिका अपने महबूब (प्रेमी) के हुस्न और उसकी सादगी की तारीफ कर रही है। गाने के मुख्य बोल और उनके हिंदी अर्थ कुछ इस प्रकार हैं:
तू सांवल फूल कस्तूरी
हिंदी अर्थ: तुम सांवले रंग के ऐसे खूबसूरत फूल हो, जिसमें कस्तूरी जैसी मदहोश करने वाली खुशबू है।
तेरी थी गई बहु मशहूरी
हिंदी अर्थ: तुम्हारी खूबसूरती और चर्चा की शोहरत बहुत दूर-दूर तक फैल चुकी है।
झा-झा ते, हर झा ते, पाए देंदे लोक मिसाल
हिंदी अर्थ: तुम जहां-जहां भी जाते हो, लोग तुम्हारी खूबसूरती और शख्सियत की मिसाल देते हैं।
चलरे/चलड़े चलड़े वाल, मोढ़े रखदा ऐ काली शाल
हिंदी अर्थ: तुम्हारे लहराते और घुंघराले बाल, और तुमने अपने कंधे पर जो काली शॉल ओढ़ी है, वह तुम पर बहुत जंचती है।
हथ चे रत्ता रुमाल, तेरियां रीसां कौन करे
हिंदी अर्थ: तुम्हारे हाथ में लाल रंग का रुमाल है, और तुम्हारी बराबरी इस दुनिया में कौन कर सकता है? यानी तुम बेजोड़ हो।
पाकिस्तान से है इस गाने का खास कनेक्शन:
सरायकी भाषा का लोकगीत: ‘चलड़े चलड़े वाल’ मूल रूप से सरायकी भाषा का एक बेहद प्रसिद्ध पारंपरिक लोकगीत है। यह भाषा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में बोली जाती है।
दिग्गज गायकों की आवाज: इस खूबसूरत धुन को समय-समय पर कई महान कलाकारों ने अपनी आवाज दी है। इसमें प्रसिद्ध पाकिस्तानी लोक गायक मोहम्मद हुसैन बंदियालवी और दिवंगत सरायकी गायक शफाउल्लाह खान रोखरी के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं, जिनकी आवाजों ने इस लोकगीत को अमर बनाया है। अब नए अंदाज में इसे सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है।
90 के दशक के क्लासिक गानों से हो रही है तुलना:
इस गाने की मिठास और सादगी को देखते हुए कई संगीत प्रेमी इसकी तुलना 90 के दशक के क्लासिक गानों (जैसे पंकज उधास का प्रसिद्ध गीत ‘ना कजरे की धार’) से कर रहे हैं। हालांकि, दोनों गानों के बीच कोई आधिकारिक संबंध या क्रेडिट का लेन-देन नहीं है, लेकिन इसकी रूहानी तासीर पुराने दौर के रोमांटिक गीतों की याद जरूर दिला देती है।

