हरकी पैड़ी पर पांच दिन बाद फिर लौटी रौनक: गंगनहर की वार्षिक बंदी के बीच यूपी सिंचाई विभाग ने की गंगाजल की व्यवस्था
हरकी पैड़ी पर पांच दिन बाद फिर लौटी रौनक: गंगनहर की वार्षिक बंदी के बीच यूपी सिंचाई विभाग ने की गंगाजल की व्यवस्था
हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध हरकी पैड़ी पर बीते पांच दिनों से छाया सन्नाटा आखिरकार रविवार को समाप्त हो गया। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा अस्थायी व्यवस्था के तहत गंगाजल हरकी पैड़ी की ओर मोड़े जाने के बाद श्रद्धालुओं ने एक बार फिर पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। घाटों पर जल का प्रवाह शुरू होते ही श्रद्धालुओं, तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय व्यापारियों के चेहरों पर खुशी लौट आई है।
क्यों बंद हुआ था हरकी पैड़ी पर पानी का प्रवाह?
गंगनहर की वार्षिक बंदी: हर साल दशहरे के दिन से गंगनहर की वार्षिक बंदी शुरू होती है, जो दिवाली तक जारी रहती है। इस दौरान नहर की मरम्मत, रखरखाव और गंगा घाटों की साफ-सफाई का कार्य किया जाता है।
श्रद्धालुओं और व्यवसाय पर असर: पानी की आपूर्ति रुकने से पिछले पांच दिनों से हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर जलस्तर नगण्य हो गया था, जिससे आचमन तक के लिए पानी उपलब्ध नहीं था। इसके चलते दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को निराशा हाथ लग रही थी और वे अन्य घाटों की ओर रुख करने को मजबूर थे। साथ ही, पूजा-पाठ कराने वाले तीर्थ पुरोहितों, पंडितों और प्रसाद व फूल विक्रेताओं का कामकाज भी ठप पड़ा हुआ था।
यूपी सिंचाई विभाग की पहल (अस्थायी बांध का निर्माण):
प्लास्टिक की बोरियों से बना बांध: श्रद्धालुओं की बढ़ती परेशानी को देखते हुए यूपी सिंचाई विभाग ने संजय पुल के नीचे प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरकर एक अस्थायी बांध तैयार किया।
गंगाजल की आपूर्ति बहाल: इस अस्थायी बांध के जरिए गंगा के मुख्य प्रवाह से जल को हरकी पैड़ी की ओर मोड़ दिया गया है, जिससे अब घाटों पर डुबकी लगाने और पूजा-अर्चना करने लायक पर्याप्त पानी उपलब्ध हो गया है।
स्थानीय पुरोहितों और व्यापारियों में उत्साह:
हरकी पैड़ी पर जलस्तर बहाल होने के बाद फिर से धार्मिक अनुष्ठान, स्नान और दान-पुण्य का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय पुरोहितों का कहना है कि हालांकि गंगनहर बंदी के कारण दोपहर के समय भीड़ थोड़ी कम देखी जा रही थी, लेकिन अब पर्याप्त गंगाजल उपलब्ध होने से हरकी पैड़ी पर पूरे दिन के लिए धार्मिक गतिविधियां सामान्य हो गई हैं।

