Thursday, October 8, 2026
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जीवन, मौत और सेना से जुड़ाव के अनूठे फलसफे से ओतप्रोत थे नाना पाटेकर

जीवन, मौत और सेना से जुड़ाव के अनूठे फलसफे से ओतप्रोत थे नाना पाटेकर

​हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके जीवन से जुड़े कई अनछुए पहलू, विचार और संस्मरण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। ‘मरने के बाद भी जिंदा रहते हैं हम, आत्मा को मौत भी तोहफा लगती है’ जैसे दार्शनिक विचार रखने वाले नाना पाटेकर अपनी बेबाकी, सादगी और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उनके निधन पर पूर्व सेना प्रमुख और मिजोरम के गवर्नर जनरल वी.के. सिंह सहित तमाम दिग्गजों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

​नाना पाटेकर के जीवन के अनछुए पहलू और वायरल संस्मरण से जुड़ी मुख्य बातें:

​मृत्यु और जीवन का दार्शनिक नजरिया: नाना पाटेकर का एक पुराना वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वे जिंदगी और मौत की सच्चाई को बेहद सहजता से समझाते नजर आते हैं। वीडियो में वे कहते हैं, “मौत के बाद 10 मिनट तक दिल, 20 मिनट तक दिमाग और 4 घंटों के लिए आंखें जिंदा रहती हैं। उन चार घंटों में आंखें अपनों का रवैया देखती होंगी। उसके बाद मुर्दे को तो मौत एक तोहफे जैसी लगती होगी।” इसके अलावा, अपनी अंत्येष्टि और लकड़ी को लेकर उनका एक अन्य वीडियो भी उनकी बेबाक और पारदर्शी सोच का आईना है।

​चकाचौंध से दूर ग्रामीण जीवन: जून 2025 में अमिताभ बच्चन के शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 17’ में शिरकत करते हुए नाना पाटेकर ने बताया था कि वह मायानगरी की चकाचौंध या पार्टियों से दूर रहना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा था, “मैं फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हूं। मैं बस यहां काम करने आता हूं और फिर वापस चला जाता हूं। मैं गांव का हूं और वहीं रहना पसंद करता हूं।”

​फिल्म ‘प्रहार’ के लिए तीन साल की कड़ी सैन्य ट्रेनिंग: बॉलीवुड में कई कलाकारों ने सैनिकों के किरदार निभाए, लेकिन नाना पाटेकर का अंदाज अलग था। साल 1991 में आई अपनी निर्देशित फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में मेजर प्रताप चौहान का किरदार निभाने के लिए उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ लगभग तीन साल तक कड़ी मिलिट्री ट्रेनिंग ली थी, ताकि पर्दे पर उनका अभिनय वास्तविक लगे।

​कारगिल युद्ध और फ्रंटलाइन पर सेवा: वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान नाना पाटेकर ने सिर्फ दूर बैठकर समर्थन देने के बजाय तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से विशेष अनुमति लेकर युद्ध क्षेत्र में जाने की इच्छा जताई थी। वह लगभग दो महीने तक सेना की क्विक रिएक्शन टीम के साथ एलओसी के पास रहे थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उस दौरान सैनिकों के बीच रहने से उनका वजन 76 किलो से घटकर 56 किलो रह गया था, और यह अनुभव उनकी पूरी जिंदगी बदलने वाला था।

​जनरल वी.के. सिंह की श्रद्धांजलि: नाना पाटेकर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए पूर्व सेना प्रमुख और मिजोरम के गवर्नर जनरल जनरल वी.के. सिंह ने ‘एक्स’ पर लिखा कि उन्होंने ‘प्रहार’ की शूटिंग के दौरान नाना को बहुत करीब से देखा है। उन्होंने उनके अनुशासन, कड़ी मेहनत और काम के प्रति गंभीर रवैये को सराहते हुए कहा कि वे न केवल एक बेहतरीन अभिनेता थे, बल्कि एक प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी भी थे।

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