अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दो टूक: ‘निष्पक्ष डील करो वरना अस्तित्व पर होगा खतरा’; फ्लाईदुबई फ्लाइट घटना में भी ईरान की भूमिका से इंकार नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दो टूक: ‘निष्पक्ष डील करो वरना अस्तित्व पर होगा खतरा’; फ्लाईदुबई फ्लाइट घटना में भी ईरान की भूमिका से इंकार नहीं
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर बेहद कड़े तेवर दिखाए हैं। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान को अमेरिका के साथ एक बहुत ही निष्पक्ष डील (समझौता) करनी होगी, अन्यथा उसके अस्तित्व पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। ईरान की तरफ से तनाव कम करने और बातचीत आगे बढ़ाने का जो प्रस्ताव भेजा गया था, ट्रंप ने उसे खारिज कर दिया है।
फ्लाईदुबई फ्लाइट घटना और ईरान का एंगल:
हाल ही में दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट (FZ1073) में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हुए जानलेवा हमले के मामले में भी ट्रंप से ईरान की संभावित भूमिका को लेकर सवाल किया गया।
ट्रंप का बयान: अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि उन्हें मिली खुफिया जानकारी के आधार पर वह इस घटना में ईरान की भूमिका होने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं कर रहे हैं, हालांकि इस पर अभी जांच और काम चल रहा है।
नेतन्याहू की प्रतिक्रिया: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस मामले पर कहा है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस घटना के पीछे ईरान का हाथ था या नहीं।
फ्लाईदुबई फ्लाइट FZ1073 में क्या हुआ था?
30 सितंबर की घटना: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान के दौरान ओमान के एक को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया था।
आपातकालीन स्थिति: हमले के बाद विमान लगभग 33,000 फीट की ऊंचाई से तेजी से नीचे आते हुए करीब 17,000 फीट पर आ गया था।
बहादुरी से बची जान: गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने हिम्मत नहीं हारी और कॉकपिट का दरवाजा खोलकर क्रू व यात्रियों को अंदर बुलाया, जिनकी मदद से हमलावर पर काबू पाया गया। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतार लिया गया।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव:
रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका के पास एक प्रस्ताव भेजा था, जिसमें युद्ध रोकने, नाकेबंदी हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने जैसी शर्तें थीं। लेकिन ट्रंप द्वारा इस प्रस्ताव को ठुकराए जाने और उनके इस ताजा बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका अब ईरान पर एक नई और कड़ी शर्तों वाली डील के लिए भारी दबाव बना रहा है।
