भारत के प्रोफेसर बिमल पटेल ने जर्मनी के हैम्बर्ग में ली ITLOS के जज के रूप में शपथ, 9 साल का होगा कार्यकाल
भारत के प्रोफेसर बिमल पटेल ने जर्मनी के हैम्बर्ग में ली ITLOS के जज के रूप में शपथ, 9 साल का होगा कार्यकाल
भारत के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ प्रोफेसर बिमल पटेल ने जर्मनी के हैम्बर्ग स्थित ट्रिब्यूनल में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (ITLOS) के जज के रूप में आधिकारिक तौर पर शपथ ले ली है। इस पद पर उनका कार्यकाल 9 वर्षों का होगा। उनकी इस नियुक्ति से समुद्री कानून से जुड़े इस प्रमुख वैश्विक न्यायिक संस्थान में भारत की मौजूदगी बरकरार है। उनसे पहले भारतीय जज नीरू चड्ढा का कार्यकाल बुधवार को समाप्त हुआ था, जो आईटीएलओएस की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
चुनाव और पृष्ठभूमि:
शानदार जीत: पिछले साल न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुए चुनाव में बिमल पटेल को 168 वैध वोटों में से 115 वोट मिले थे। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) से कुल 172 देश जुड़े हुए हैं।
प्रमुख उपलब्धियां: बिमल पटेल संयुक्त राष्ट्र के इंटरनेशनल लॉ कमीशन के सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा वह गुजरात की राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी और जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय कानून में पीएचडी की है।
अन्य नवनिर्वाचित न्यायाधीश:
प्रोफेसर बिमल पटेल के साथ जिन अन्य चार न्यायाधीशों ने शपथ ली है, उनमें शामिल हैं:
सिल्विया अमा अदुसु (घाना)
जर्ज रोड्रिगो बांदेइरा गैलिंडो (ब्राजील)
स्लिम लघमानी (ट्यूनीशिया)
लैन-अन्ह थी गुयेन (वियतनाम)
ITLOS के बारे में खास बातें:
मुख्यालय: जर्मनी के हैम्बर्ग में स्थित यह एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्था है।
संरचना: इस ट्रिब्यूनल में कुल 21 जज होते हैं, जिन्हें दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व दिया जाता है। सभी जजों का कार्यकाल एक साथ समाप्त नहीं होता है।
कार्य: यह संस्थान 1982 की संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) की व्याख्या करता है और दुनिया भर के देशों के बीच समुद्र और महासागरों से जुड़े विवादों का कानूनी निपटारा करता है।
