लुधियाना में धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर गरमाई सियासत: शाही इमाम ने मांगी माफी, पुलिस में शिकायत की चेतावनी
लुधियाना में धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर गरमाई सियासत: शाही इमाम ने मांगी माफी, पुलिस में शिकायत की चेतावनी
लुधियाना में आयोजित ‘श्री हनुमंत कथा’ के दौरान बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री द्वारा दिए गए बयानों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पंजाब में ड्रग्स की समस्या और धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर दिए गए उनके कुछ बयानों पर लुधियाना के शाही इमाम मौलाना उस्मान रहमानी लुधियानवी ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस विवाद के बाद से शहर में धार्मिक सद्भाव और सामाजिक एकता को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
विवाद की मुख्य वजह:
कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि पंजाब में ड्रग्स के दुरुपयोग और धर्म परिवर्तन को रोकने की सख्त जरूरत है। उन्होंने सिख समुदाय को संबोधित करते हुए कहा था कि जो लोग गुरु ग्रंथ साहिब में आस्था रखते हैं, उन्हें अन्य धर्मों में परिवर्तित होने के लिए प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने धर्म परिवर्तन के खिलाफ सिख भाइयों के साथ खड़े होने की बात कही।
हालांकि, इसी संबोधन के दौरान उनके कुछ अन्य बयानों और टिप्पणियों (जैसे ‘भैया को सैंया’ बनाने संबंधी टिप्पणी और लुधियाना के लोगों को कथित तौर पर ‘पागल’ कहने) को लेकर विवाद शुरू हो गया। इसके अलावा, दुबई और पंजाब में ‘अब्दुल्ला’ के जिक्र वाले उनके बयान पर भी सवाल उठाए गए हैं।
शाही इमाम और अन्य समुदायों की कड़ी आपत्ति:
बयानों से नाराज शाही इमाम मौलाना उस्मान रहमानी लुधियानवी ने एक इमरजेंसी बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा कि किसी को भी अपने धर्म का प्रचार करने से ऐतराज नहीं है, लेकिन धार्मिक मंचों से दूसरे धर्मों या समुदायों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करना अस्वीकार्य है। शाही इमाम ने याद दिलाया कि लुधियाना के लोगों ने 1947 के बंटवारे के बाद से हमेशा सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखा है।
शाही इमाम के अलावा ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी इन टिप्पणियों पर गहरी नाराजगी जताई है और समुदाय के लोगों से एकजुट होने की अपील की है।
माफी न मांगने पर पुलिस में शिकायत की चेतावनी:
शाही इमाम ने मांग की है कि धीरेंद्र शास्त्री अपने विवादित बयानों को वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शास्त्री माफी नहीं मांगते हैं, तो वे और आयोजक कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें। इसके साथ ही, शहर में आपसी भाईचारा और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों की एक विशेष बैठक बुलाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
