हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के मयून द्वीप पर कब्जा जमाया, विश्व व्यापार पर खतरा
हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के मयून द्वीप पर कब्जा जमाया, विश्व व्यापार पर खतरा
अपडेट: यमन के हूती बलों ने पश्चिमी तट और कई रणनीतिक द्वीपों पर पूर्ण नियंत्रण का दावा
यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने शुक्रवार (11 सितंबर 2026) को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में स्थित रणनीतिक मयून द्वीप (जिसे पेरिम द्वीप भी कहा जाता है) पर कब्जा कर लिया। यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के एक स्थानीय अधिकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सरकारी सेनाओं के द्वीप से पीछे हटने के बाद हूती लड़ाके नावों से पहुंचे और बिना बड़े प्रतिरोध के नियंत्रण हासिल कर लिया।
मयून द्वीप लगभग 13 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला ज्वालामुखीय द्वीप है, जो जलडमरूमध्य के सबसे संकरे हिस्से में स्थित है और इसे दो शिपिंग लेन में विभाजित करता है। इसके कब्जे के साथ हूतियों ने बाब अल-मंदेब क्षेत्र पर अपना नियंत्रण पूरा कर लिया है। इससे पहले गुरुवार को उन्होंने रेड सी के महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा (मोखा) पर कब्जा किया था और तटीय क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ते हुए धुबाब समेत कई इलाकों को अपने कब्जे में ले लिया। बाद की रिपोर्टों में कहा गया कि उन्होंने ग्रेटर और लेसर हनीश द्वीपों समेत यमन के पूरे पश्चिमी रेड सी तट पर भी नियंत्रण स्थापित कर लिया है।
व्यापार पर असर
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य यूरोप और एशिया को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। आमतौर पर दुनिया के लगभग 12 प्रतिशत माल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। यह सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए भी खास तौर पर महत्वपूर्ण हो गया है, खासकर जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा हुआ है। हूती प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि समुद्री नेविगेशन सभी कंपनियों के लिए सुरक्षित है, सिवाय सऊदी जहाजों के। हालांकि, विशेषज्ञों और बाजारों में चिंता बनी हुई है क्योंकि हूती पहले भी रेड सी में जहाजों पर हमले कर चुके हैं।
प्रतिक्रिया और पृष्ठभूमि
सऊदी अरब ने मोखा हवाई अड्डे पर हवाई हमले किए, जिसकी पुष्टि हूती मीडिया ने की। हूतियों ने पिछले सप्ताह शुरू किए गए बड़े हमले में तेजी से क्षेत्रीय लाभ हासिल किए हैं। यह घटना व्यापक मध्य पूर्व तनाव के बीच हुई है, जिसमें ईरान और अन्य पक्ष शामिल हैं। हूती अधिकारियों का कहना है कि यह सऊदी आक्रामकता के जवाब में है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय और शिपिंग कंपनियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। बाब अल-मंदेब जैसे चोकपॉइंट पर नियंत्रण से वैश्विक व्यापार, तेल कीमतों और समुद्री सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। आगे की घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।
(सभी जानकारी उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति तेजी से बदल सकती है।)
