सोशल मीडिया से आतंक तक: शहजाद भट्टी के कथित नेटवर्क का खुलासा, 14 राज्यों तक फैले मॉड्यूल की जांच
सोशल मीडिया से आतंक तक: शहजाद भट्टी के कथित नेटवर्क का खुलासा, 14 राज्यों तक फैले मॉड्यूल की जांच
नई दिल्ली: भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच में पाकिस्तान के कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े शहजाद भट्टी को लेकर कई गंभीर जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, भट्टी का नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को निशाना बनाकर उन्हें लालच देने और फिर कथित आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल करने के मॉडल पर काम कर रहा था।
एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क में आर्थिक रूप से कमजोर, बेरोजगार और कम उम्र के युवाओं को सोशल मीडिया पर तलाशा जाता था। शुरुआत में उन्हें पैसे, हथियार, सोशल मीडिया पर पहचान और विदेश जाने जैसे लालच दिए जाते थे। इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें आपराधिक और कथित आतंकी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश की जाती थी।
इस्लामाबाद से चल रहा था कथित ‘आतंक का कॉल सेंटर’
जांच एजेंसियों के मुताबिक, भट्टी ने कथित तौर पर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक कॉल सेंटर जैसा नेटवर्क बनाया था। यहां से सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं से संपर्क किए जाने का दावा है।
आरोप है कि नेटवर्क से जुड़े लोग अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर युवाओं की प्रोफाइल तलाशते और निजी संदेशों के जरिए बातचीत शुरू करते थे। बाद में वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें कथित हैंडलर्स से जोड़ा जाता था।
एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क एक संगठित प्रक्रिया के तहत काम करता था—सोशल मीडिया पर संपर्क, भरोसा कायम करना, आर्थिक लालच देना और फिर युवाओं को कथित मॉड्यूल से जोड़ना।
पाकिस्तान से फंडिंग और हथियार पहुंचाने का दावा
जांच में यह भी दावा किया गया है कि नेटवर्क के लिए पैसा और हथियार पाकिस्तान से उपलब्ध कराए जाते थे। पाकिस्तान में मौजूद कथित हैंडलर्स भारत में सक्रिय मॉड्यूल को निर्देश देते थे।
जांच एजेंसियों ने कुछ संदिग्ध नाम भी सामने आने की बात कही है, हालांकि इनमें से कुछ नाम कोडनेम होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
कौन है शहजाद भट्टी?
भारतीय एजेंसियों के अनुसार, शहजाद भट्टी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला है और उसका नाम वहां आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। दावा है कि करीब 2015 के आसपास वह पाकिस्तान से दुबई पहुंचा, जहां उसने कारोबार शुरू किया और कथित तौर पर अपराध जगत से जुड़े लोगों के संपर्क में आया।
दुबई में रहते हुए उसने ‘333’ नाम से सोशल मीडिया गतिविधियां शुरू कीं। भारत-पाकिस्तान संबंधों, धार्मिक मुद्दों और सोशल मीडिया विवादों पर वीडियो के जरिए उसने बड़ी संख्या में फॉलोअर्स बनाए।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि सोशल मीडिया पर बनाई गई यह लोकप्रियता कथित तौर पर युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए भी इस्तेमाल की गई।
सोशल मीडिया बना कथित भर्ती का जरिया
जांच के मुताबिक, नेटवर्क ऐसे युवाओं को निशाना बनाता था जो आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हों या जल्दी पैसा कमाने की तलाश में हों।
पहले सामान्य बातचीत और छोटे कामों के जरिए भरोसा बनाने की कोशिश की जाती थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कुछ युवाओं से स्थानों की तस्वीरें और वीडियो जुटाने जैसे काम कराए गए। बाद में उन्हें गंभीर आपराधिक गतिविधियों की ओर धकेलने का प्रयास किया गया।
कई राज्यों में कार्रवाई का दावा
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, मई 2026 के पहले सप्ताह में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में कार्रवाई की गई।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सैकड़ों संदिग्ध मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया अकाउंट्स की पड़ताल की गई। कई लोगों से पूछताछ की गई, जबकि कुछ युवाओं की काउंसलिंग कर उन्हें कथित नेटवर्क से दूर रखने के प्रयास किए गए।
जांच एजेंसियों की ओर से 200 से अधिक गिरफ्तारियों और लगभग इतनी ही संख्या में लोगों के डी-रेडिकलाइजेशन की कार्रवाई का दावा किया गया है।
TTH से भी कनेक्शन की जांच
जांच में भट्टी के नेटवर्क को कथित तौर पर ‘तेहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (TTH) से जोड़कर भी देखा जा रहा है। दिल्ली और फरीदाबाद में दीवारों पर TTH लिखे जाने के मामलों की जांच में यह एंगल सामने आने की बात कही गई है।
हालांकि, ऐसे आरोपों और विभिन्न घटनाओं के बीच संबंधों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों और अदालत की प्रक्रिया से होना बाकी है।
पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ संदिग्धों को पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने और घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के बदले पैसे देने का लालच दिए जाने की बात सामने आई है।
पंजाब में पुलिसकर्मियों की हत्या और पुलिस प्रतिष्ठानों पर हमलों समेत कई मामलों को एजेंसियां कथित भट्टी नेटवर्क से जोड़कर जांच कर रही हैं। कुछ मामलों में रेकी किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
संवेदनशील ठिकानों की रेकी का भी दावा
जांच एजेंसियों के मुताबिक, नेटवर्क की गतिविधियां कथित तौर पर केवल छोटे हमलों तक सीमित नहीं थीं। लखनऊ के सैन्य क्षेत्र, बमरौली एयरपोर्ट और दिल्ली-मुंबई समेत कई संवेदनशील स्थानों की रेकी किए जाने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है।
दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन से जुड़े स्थानों, राजनीतिक कार्यालयों, धार्मिक स्थलों और अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाए जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
इसी तरह पंजाब और हरियाणा में कुछ महत्वपूर्ण स्थानों के वीडियो और GPS लोकेशन पाकिस्तान भेजे जाने का दावा भी जांच में सामने आने की बात कही गई है।
14 राज्यों तक नेटवर्क फैलने का दावा
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क की मौजूदगी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल तक होने की जांच की जा रही है।
ऑनलाइन संपर्क से ऑफलाइन गतिविधियों तक
जांच एजेंसियों के लिए इस मामले में सबसे बड़ी चिंता सोशल मीडिया के कथित इस्तेमाल को लेकर है। आरोप है कि पारंपरिक आतंकी प्रचार के बजाय युवाओं तक व्यक्तिगत संपर्क, पैसे और रोजगार अथवा विदेश जाने जैसे लालच के जरिए पहुंच बनाई जा रही थी।
हालांकि, भट्टी और उसके नेटवर्क से जुड़े इन आरोपों में से कई अभी जांच के दायरे में हैं। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
