नितिन नवीन की टीम में बड़ा दांव, विनोद तावड़े को मिली यूपी की कमान; जानिए क्यों अहम है जिम्मेदारी
नितिन नवीन की टीम में बड़ा दांव, विनोद तावड़े को मिली यूपी की कमान; जानिए क्यों अहम है जिम्मेदारी
नई दिल्ली: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के ऐलान के बाद अब पार्टी ने तीन अहम चुनावी राज्यों के प्रभारी भी तय कर दिए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े को सौंपी गई है। साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा के लिए यूपी का चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है।
यूपी में तावड़े की नियुक्ति क्यों महत्वपूर्ण?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राजनीतिक राज्य है और लोकसभा में इसकी 80 सीटें हैं। ऐसे में विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन आगामी लोकसभा राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
भाजपा ने यूपी की जिम्मेदारी ऐसे नेता को दी है, जिसे संगठन और चुनावी प्रबंधन का लंबा अनुभव है। विनोद तावड़े इससे पहले बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में पार्टी के प्रभारी रह चुके हैं। बिहार में उनके संगठनात्मक कौशल की खास तौर पर चर्चा हुई थी।
मंत्री से लेकर टिकट कटने तक का सफर
महाराष्ट्र के रहने वाले विनोद तावड़े ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की थी। इसके बाद वह महाराष्ट्र भाजपा में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। वह विधान परिषद के सदस्य रहे और वहां नेता विपक्ष की भूमिका भी निभाई।
2014 में उन्होंने बोरिवली विधानसभा सीट से चुनाव जीता और देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री बने। उनके पास शिक्षा, मेडिकल शिक्षा, खेल और युवा मामलों जैसे महत्वपूर्ण विभाग रहे।
हालांकि, 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी का टिकट नहीं मिला। उनके स्थान पर बोरिवली से सुनील राणे को उम्मीदवार बनाया गया। यह तावड़े के राजनीतिक करियर के लिए बड़ा झटका माना गया।
महाराष्ट्र से दिल्ली तक बढ़ी भूमिका
विधानसभा टिकट कटने के बाद तावड़े की सक्रिय भूमिका महाराष्ट्र की राजनीति में भले कम हुई, लेकिन भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर उनकी जिम्मेदारियां बढ़ानी शुरू कर दीं।
2019 से 2022 के बीच उनके पास कोई बड़ी चुनावी जिम्मेदारी नहीं थी। इसके बाद राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्हें भाजपा की चुनाव प्रबंधन समिति का सह-संयोजक बनाया गया। 2024 में उन्हें पार्टी के सदस्यता अभियान की जिम्मेदारी भी मिली।
इस दौरान उनका फोकस संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय पर रहा।
बिहार चुनाव ने दिलाई बड़ी पहचान
विनोद तावड़े को सबसे ज्यादा चर्चा तब मिली, जब उन्हें बिहार का प्रभारी बनाया गया। वहां उन्होंने संगठन और गठबंधन के स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के साथ बेहतर तालमेल बनाने में भी उनकी भूमिका बताई गई।
तावड़े की राजनीतिक शैली की एक खासियत यह मानी जाती है कि वह मीडिया की सुर्खियों से ज्यादा संगठन के भीतर काम करने पर जोर देते हैं। बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से संपर्क, चुनावी रणनीति और सहयोगी दलों के साथ समन्वय को उनकी प्रमुख ताकत माना जाता है।
यूपी में होगी बड़ी परीक्षा
अब उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी तावड़े के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा लेकर आई है। भाजपा के लिए राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करना महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
यूपी में पार्टी को संगठन, बूथ मैनेजमेंट, सहयोगी दलों के साथ तालमेल और चुनावी रणनीति को एक साथ साधना होगा। ऐसे में तावड़े का लंबा संगठनात्मक अनुभव और चुनाव प्रबंधन की क्षमता भाजपा के लिए कितनी कारगर साबित होती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
