झारखंड में JSSC-CGL समेत TDPL की सभी परीक्षाएं रद्द, नौकरी पा चुके करीब 2 हजार युवाओं का विरोध; सरकार के फैसले पर उठे सवाल
झारखंड में JSSC-CGL समेत TDPL की सभी परीक्षाएं रद्द, नौकरी पा चुके करीब 2 हजार युवाओं का विरोध; सरकार के फैसले पर उठे सवाल
झारखंड सरकार ने सोमवार रात बड़ा फैसला लेते हुए टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) की ओर से आयोजित JPSC-14 और JSSC-CGL समेत सभी परीक्षाओं और उनके नतीजों को रद्द करने का ऐलान किया। इसके साथ ही JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा की जांच कराने का फैसला भी लिया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद जहां आंदोलन कर रहे छात्रों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया, वहीं पहले से नियुक्त हो चुके युवाओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
प्रोजेक्ट भवन के बाहर नियुक्त युवाओं का प्रदर्शन
सरकार के फैसले के बाद JSSC-CGL परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले युवाओं ने रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की, नियुक्ति हासिल की और अब अपने पदों पर काम कर रहे हैं।
इन युवाओं का कहना है कि पूरी परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने से उनका भविष्य संकट में पड़ गया है। अनुमान है कि सरकार के फैसले से करीब 2 हजार नियुक्त कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं।
‘हमारा गुनाह क्या है?’
प्रदर्शन कर रहे एक युवक ने सरकार से सवाल किया कि अगर जांच में पेपर लीक नहीं होने की बात सामने आई थी, तो नियुक्त अभ्यर्थियों को दोषी क्यों माना जा रहा है।
प्रदर्शनकारी ने कहा कि सरकार अदालत में हलफनामा देकर यह स्पष्ट करे कि नियुक्त कर्मचारियों का क्या अपराध है। उनका कहना है कि केवल आंदोलन के दबाव में आकर मौखिक आदेश के जरिए किसी की नौकरी नहीं छीनी जा सकती।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि उनकी नियुक्तियां अदालत के आदेश के बाद हुई हैं। ऐसे में सरकार को अपनी जांच रिपोर्ट अदालत के सामने रखनी चाहिए और नियुक्त कर्मचारियों को अपना पक्ष अदालत में रखने का मौका मिलना चाहिए।
24 दिनों से आंदोलन कर रहे थे छात्र
JPSC और JSSC अभ्यर्थी पिछले 24 दिनों से परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। उनकी प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना और संबंधित परीक्षाओं की जांच शामिल थी।
सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने इन मांगों पर बड़ा फैसला लिया।
हेमंत सोरेन ने क्या ऐलान किया?
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा आउटसोर्स एजेंसी TDPL की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी किए गए नतीजों को भी रद्द करने का फैसला लिया गया है।
सरकार ने TDPL के जरिए चयनित या नियुक्त किए गए अभ्यर्थियों के चयन को भी रद्द करने की बात कही है। यही फैसला अब नियुक्त कर्मचारियों के विरोध की मुख्य वजह बन गया है।
परीक्षा सुधार समिति का गठन
सरकार ने भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार समिति बनाने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, समिति विभिन्न संस्थानों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से बातचीत कर परीक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधारों की सिफारिश करेगी।
सरकार ने यह भी कहा है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण) अधिनियम पहले ही लागू किया जा चुका है।
अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती
सरकार के फैसले से एक तरफ आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें पूरी हुई हैं, लेकिन दूसरी तरफ पहले से नौकरी कर रहे युवाओं के सामने भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ उन अभ्यर्थियों के हितों का भी समाधान निकाला जाए, जो चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद नियुक्त होकर काम कर रहे हैं। मामला आगे अदालत तक पहुंचने की संभावना के बीच सरकार के अगले कदम पर सभी की नजरें रहेंगी।
