एयर इंडिया टर्बुलेंस मामला: पायलट-इन-कमांड का डोप टेस्ट पॉजिटिव, DGCA जांच के नियम और प्रावधान
एयर इंडिया टर्बुलेंस मामला: पायलट-इन-कमांड का डोप टेस्ट पॉजिटिव, DGCA जांच के नियम और प्रावधान
4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में भीषण टर्बुलेंस (300 फीट अचानक नीचे गिरने) के बाद दिल्ली पहुंचने पर दोनों पायलटों का डोप टेस्ट कराया गया था। इसमें विमान के पायलट-इन-कमांड (Pilot-in-Command) का साइकोएक्टिव पदार्थ का पहला टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। हालांकि, अंतिम पुष्टि के लिए दूसरे टेस्ट के नतीजों का इंतजार है।
1. DGCA की जांच के मुख्य एंगल
विमान का संचालन: पायलटों ने अचानक आए टर्बुलेंस की स्थिति को किस तरह से संभाला।
मौसम या अन्य कारण: टर्बुलेंस प्राकृतिक मौसम की वजह से आया या किसी तकनीकी चूक के कारण।
तकनीकी नुकसान: 300 फीट अचानक नीचे गिरने से विमान के हाइड्रोलिक या अन्य सिस्टम में कोई खराबी तो नहीं हुई।
इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला: घटना के बाद विमान को दिल्ली तक ले जाना सही था या नजदीकी एयरपोर्ट (जैसे वाराणसी या लखनऊ) पर लैंड कराना चाहिए था।
ड्यूटी से निलंबन: जांच पूरी होने तक दोनों पायलटों को फ्लाइंग ड्यूटी से हटा दिया गया है।
2. पायलट के नशे में पाए जाने पर DGCA के नियम
पहली बार पॉजिटिव आने पर: पायलट को तुरंत नशामुक्ति (De-addiction) और पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है। इलाज के बाद डोप टेस्ट नेगेटिव आने पर ही दोबारा उड़ान की अनुमति मिलती है।
दूसरी बार पॉजिटिव आने पर: पायलट का लाइसेंस 3 साल के लिए निलंबित कर दिया जाता है।
तीसरी बार पॉजिटिव आने पर: पायलट का फ्लाइंग लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाता है।
3. ICAO (अंतरराष्ट्रीय नियम)
अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के नियमों के अनुसार, कोई भी लाइसेंसधारी पायलट किसी भी ऐसे साइकोएक्टिव (नशीले) पदार्थ के प्रभाव में विमान नहीं उड़ा सकता, जिससे उसकी उड़ान को सुरक्षित रूप से संचालित करने की क्षमता प्रभावित हो।
