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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान: ‘आंदोलन कर रही Gen Z देशविरोधी नहीं’, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर रखी स्पष्ट राय

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान: ‘आंदोलन कर रही Gen Z देशविरोधी नहीं’, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर रखी स्पष्ट राय

​नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हालिया छात्र आंदोलनों और ‘जेन जी’ (Gen Z) को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि नई पीढ़ी विरोध-प्रदर्शन कर रही है, तो उन्हें ‘देशविरोधी’ (एंटी-नेशनल) नहीं कहा जाना चाहिए। वे हमारे अपने लोग हैं और लोकतंत्र में अपनी बात रखने व सवाल पूछने का अधिकार सभी को है।

​1. ‘Gen Z’ और युवा आंदोलनों पर विचार

​ईमानदार और तार्किक पीढ़ी: भागवत ने कहा कि जेन जी और जेन अल्फा मौजूदा पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार हैं। वे केवल आदेश नहीं मानते, बल्कि तार्किक जवाब और अपनापन चाहते हैं।

​’शास्‍त्रार्थ’ की परंपरा: लोकतंत्र में संवाद और बहस ही सहमति बनाने का माध्यम हैं। उन्होंने इसकी तुलना भारतीय परंपरा के ‘शास्त्रार्थ’ से की।

​संविधान का दायरा: युवाओं को डॉ. भीमराव आंबेडकर के भाषणों और संविधान की भावना को समझने की सलाह दी, ताकि आंदोलन समाज में विभाजन पैदा करने के बजाय व्यवस्था में सुधार का जरिया बने।

​युवाओं पर भरोसा: छात्रों पर कथित पैलेट गन फायरिंग के सवाल पर उन्होंने कहा कि हालांकि उनके पास पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन यदि आंख मूंदकर भरोसा करने की बात होगी तो वे युवाओं (Gen Z) पर भरोसा करेंगे।

​2. शिक्षा प्रणाली में सुधार और बजट की मांग

​बजट का 6% शिक्षा पर: भागवत ने शिक्षा पर कुल बजट का 6 प्रतिशत खर्च करने की लंबे समय से चली आ रही मांग का खुलकर समर्थन किया और 10 लाख रिक्त शिक्षक पदों को भरने की जरूरत बताई।

​कमाई का जरिया नहीं: उन्होंने कहा कि शिक्षा भावी पीढ़ी के निर्माण के लिए है, पैसा कमाने के लिए नहीं। सबसे पहले शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देना होगा।

​3. विदेश नीति, सामाजिक मुद्दे और LGBTQ+

​पाकिस्तान और चीन से संवाद: युद्ध या आतंकवाद के समय भारत को राष्ट्रीय हितों पर स्पष्ट रुख रखना चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन देशों से हमेशा के लिए संवाद बंद नहीं किया जा सकता।

​LGBTQ+ और समलैंगिक विवाह: LGBTQ+ समुदाय को समाज का अभिन्न हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि वे सम्मानपूर्वक साथ रह सकें, ऐसा तरीका निकाला जाना चाहिए। हालांकि, विवाह जैसी स्थापित सामाजिक संस्था से छेड़छाड़ पर उन्होंने सतर्कता बरतने की बात कही।

​महिलाओं की भूमिका: महिलाएं हर क्षेत्र में सक्षम हैं और उन्हें समान अवसर मिलने चाहिए। संघ में महिलाओं की भागीदारी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि स्थापना के समय परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन आज के बदलते दौर में ऐसे सवाल उठना स्वाभाविक है।

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