व्हाइट हाउस फैक्ट शीट: चीन पर 22 करोड़ अमेरिकियों का वोटर डेटा चुराने का आरोप और भारत-एशिया पर यूएस की नई पब्लिक डिप्लोमेसी नीति
व्हाइट हाउस फैक्ट शीट: चीन पर 22 करोड़ अमेरिकियों का वोटर डेटा चुराने का आरोप और भारत-एशिया पर यूएस की नई पब्लिक डिप्लोमेसी नीति
वाशिंगटन:
अमेरिकी प्रशासन ने विदेशी हस्तक्षेप और सार्वजनिक कूटनीति (Public Diplomacy) को लेकर दो बड़े और महत्वपूर्ण अपडेट जारी किए हैं। एक तरफ व्हाइट हाउस ने इंटेलिजेंस दस्तावेजों के हवाले से चीन पर अमेरिकी चुनावों में बड़े पैमाने पर डेटा चोरी का आरोप लगाया है, तो दूसरी तरफ वाशिंगटन ने भारत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र को अपनी नई सूचना कूटनीति के केंद्र में रखने का ऐलान किया है।
1. चीन ने हासिल किया 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों का डेटा: व्हाइट हाउस
व्हाइट हाउस गवर्नमेंट ट्रांसपेरेंसी टास्क फोर्स द्वारा जारी एक फैक्ट शीट में खुलासा किया गया है कि सार्वजनिक किए गए अमेरिकी इंटेलिजेंस दस्तावेजों से पता चलता है कि चीन और उसके प्रॉक्सी ऑपरेटरों ने 220 मिलियन (22 करोड़) अमेरिकियों का वोटर रजिस्ट्रेशन डेटा हासिल कर लिया था। इसमें ऐसी संवेदनशील जानकारियां भी शामिल हैं जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थीं।
इंटेलिजेंस एजेंसियों की मंजूरी: इस फैक्ट शीट और जारी जानकारी को नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर के ऑफिस (ODNI), NSA, CIA, FBI और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) की अंतिम मंजूरी मिली है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में विदेशी चुनाव गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों को डीक्लासिफाई करने के फैसले के तहत उठाया गया है।
साइबर ऑपरेशन्स (CNE): 2022 के इंटेलिजेंस दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया गया कि चीनी ‘कंप्यूटर नेटवर्क एक्सप्लॉइटेशन’ (CNE) एजेंटों ने व्यावसायिक वेबसाइटों पर स्टोर किए गए मतदाता पंजीकरण डेटा को हैक किया था।
डेटा चोरी के खतरे: इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, दुश्मन देश इस डेटा का इस्तेमाल चुनाव वाले दिन वोटरों को भ्रमित करने, डेटा में बदलाव कर वोट डालने से रोकने या प्रोविजनल बैलेट का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर करने के लिए कर सकते हैं।
2. यूएस की पब्लिक डिप्लोमेसी में भारत और एशिया बने मुख्य फोकस
अमेरिका अब एशिया पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है और चीन तथा अन्य अधिनायकवादी (Autoritarian) सरकारों के दुष्प्रचार और सूचना अभियानों (Information Campaigns) का मुकाबला करने के लिए अपनी संचार रणनीति में बदलाव कर रहा है।
यूएसएजीएम में बड़े बदलाव की तैयारी: यूएस एजेंसी फॉर ग्लोबल मीडिया (USAGM) का नेतृत्व करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की नामांकित सारा रोजर्स ने सीनेट फॉरेन रिलेशंस कमेटी के समक्ष यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वीओए (VOA), आरएफए (RFA) और अन्य अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय मीडिया नेटवर्क का मुख्य ध्यान एशिया पर रहेगा।
भारत और जापान में डिजिटल पहुंच पर जोर: रोजर्स ने कहा कि भारत और जापान जैसे देशों में, जहां सोशल मीडिया (विशेषकर एक्स/ट्विटर) बेहद लोकप्रिय है, अमेरिका अपनी कूटनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करेगा।
शॉर्ट वीडियो और पॉडकास्ट का सहारा: पारंपरिक रेडियो और टीवी ब्रॉडकास्टिंग के बजाय अब यूएस इंटरनेशनल ब्रॉडकास्टिंग शॉर्ट-फॉर्म वीडियो, डायस्पोरा ग्रुप चैट, पॉडकास्ट और आधुनिक प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा निवेश करेगी।
रणनीतिक प्राथमिकता वाले क्षेत्र: रोजर्स ने एशिया के अलावा मिडिल ईस्ट, ईरान, अफगानिस्तान और क्यूबा को रणनीतिक प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया, जहां स्वतंत्र और निष्पक्ष जानकारी की पहुंच अभी भी सीमित है।
