डोलासन (पेंडुलम योग मुद्रा): रीढ़ को लचीला और शरीर को तरोताजा बनाने का प्रभावी अभ्यास
डोलासन (पेंडुलम योग मुद्रा): रीढ़ को लचीला और शरीर को तरोताजा बनाने का प्रभावी अभ्यास
आज की व्यस्त जीवनशैली, अनियमित खान-पान और घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने की वजह से शरीर कई समस्याओं और थकान का शिकार हो जाता है। ऐसे में ‘डोलासन’ का नियमित अभ्यास शरीर को ऊर्जावान और मांसपेशियों को मजबूत बनाने का बेहतरीन माध्यम है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी डोलासन की महत्ता पर जोर देते हुए इसे लचीलापन, रीढ़ की मजबूती और शारीरिक संतुलन बढ़ाने में अत्यंत सहायक बताया है।
क्या है डोलासन?
डोलासन एक गतिशील हठ योग मुद्रा है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘डोल’ (झूलना) और ‘आसन’ (योग मुद्रा)। इस आसन के दौरान शरीर के ऊपरी हिस्से को घड़ी के पेंडुलम की तरह झुलाया जाता है, इसलिए इसे ‘पेंडुलम पोज’ भी कहा जाता है।
डोलासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ:
रीढ़ की मजबूती व लचीलापन: यह रीढ़ की नसों को सक्रिय (एक्टिव) कर रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है।
कमर दर्द से राहत: पीठ के निचले हिस्से में हल्का खिंचाव देकर यह कमर दर्द को कम करने में मदद करता है।
कोर और पेट के लिए फायदेमंद: पेट और कोर की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।
हैमस्ट्रिंग टोनिंग: जांघ के पीछे की मांसपेशियों और नसों (हैमस्ट्रिंग) को टोन करता है।
मानसिक व शारीरिक राहत: इसके नियमित अभ्यास से थकान, सिरदर्द, तनाव और सुस्ती दूर होती है तथा शरीर में हल्कापन महसूस होता है।
डोलासन करने की सही विधि:
शुरुआती स्थिति: सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी बनाए रखें (पैर चौड़े करें)।
हाथों की स्थिति: गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में इंटरलॉक करें और सिर के पीछे रखें।
गतिविधि: सांस छोड़ते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से (धड़) को आगे झुकाएं और पेंडुलम की तरह दाएं से बाएं तथा बाएं से दाएं झुलाएं।
अवधि: रोजाना 1 से 2 मिनट तक इसका अभ्यास करें। शुरुआत में थोड़ी असहजता हो सकती है, लेकिन अभ्यास से यह सहज हो जाता है।
सावधानियां एवं परहेज:
उच्च रक्तचाप (High BP): हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों को यह आसन करने से बचना चाहिए।
हर्निया या गंभीर कमर दर्द: हर्निया के मरीजों या रीढ़/कमर में गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही इसका अभ्यास करें।
आहार: योग के साथ-साथ संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन जरूर करें, तभी इस आसन का पूरा लाभ मिलेगा।
