Thursday, July 30, 2026
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हरिद्वार में गंगा एक्सप्रेस-वे के भूमि अधिग्रहण का विरोध: किसानों ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, उपजाऊ जमीन देने से इनकार

हरिद्वार में गंगा एक्सप्रेस-वे के भूमि अधिग्रहण का विरोध: किसानों ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, उपजाऊ जमीन देने से इनकार

​हरिद्वार:

मेरठ और प्रयागराज गंगा एक्सप्रेस-वे को उत्तराखंड के हरिद्वार से जोड़ने की योजना को स्थानीय किसानों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हरिद्वार जिले के जमालपुर और सराय क्षेत्र सहित कई प्रभावित गांवों के किसानों ने एक्सप्रेस-वे के लिए अपनी उपजाऊ और सिंचित कृषि भूमि देने से साफ इनकार कर दिया है। इस संबंध में सैकड़ों किसानों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।

​किसानों की महापंचायत और मुख्य मांगें:

​हाल ही में जमालपुर कलां के रामलीला मैदान में किसानों की एक बड़ी महापंचायत आयोजित की गई थी, जिसमें जमालपुर कलां, बहादुरपुर जट, गाडोवाली, किशनपुर, कटारपुर फैरुपुर और रानी माजरा के किसानों ने सर्वसम्मति से अपनी कृषि भूमि न देने का फैसला लिया।

​ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित सुझाव व मांगें रखीं:

​गंगा किनारे से निकाला जाए एक्सप्रेस-वे: किसानों का कहना है कि एक्सप्रेस-वे को उपजाऊ खेतों के बजाय गंगा नदी के किनारे-किनारे (तटबंधीय क्षेत्र) से निकाला जाना चाहिए।

​बाढ़ और वन्यजीव संघर्ष से राहत: किसानों का मानना है कि गंगा तट के साथ एक्सप्रेस-वे बनने से तटबंध का निर्माण होगा, जिससे हर साल आने वाली बाढ़ से गांवों की सुरक्षा होगी। साथ ही, जंगलों से आबादी क्षेत्र में आने वाले हाथियों व अन्य जंगली जानवरों की समस्या पर भी रोक लगेगी।

​पुनर्वास और रोजगार की गारंटी: जिन परिवारों की आजीविका पूरी तरह से अधिग्रहित होने वाली भूमि पर निर्भर है, उनके समुचित पुनर्वास और परिवार के कम से कम एक सदस्य को रोजगार या उचित आर्थिक मुआवजा देने की व्यवस्था की जाए।

​जल निकासी और सिंचाई सुरक्षा: सड़क निर्माण के कारण खेतों की पारंपरिक जल निकासी व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए, ताकि फसलों को जलभराव से बचाया जा सके।

​प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील:

​किसानों (जिनमें परमिल, विकास, अंकित, सुरेंद्र पाल, अतुल कुमार, बृजमोहन सिंह सहित कई ग्रामीण शामिल थे) ने प्रशासन से आग्रह किया है कि वे विकास और परियोजना का स्वागत करते हैं, लेकिन अन्नदाताओं के हितों की बलि देकर विकास नहीं होना चाहिए। उन्होंने जिलाधिकारी से संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश देकर किसानों की मांगों के अनुरूप मार्ग में संशोधन करने की अपील की है।

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