कर्नाटक में ‘वंदे मातरम’ गान पर विवाद: प्रियांक खरगे ने किया फैसले का बचाव, बीजेपी नेताओं को दिए इस्तीफे की चुनौती; हाईकोर्ट में PIL दायर
कर्नाटक में ‘वंदे मातरम’ गान पर विवाद: प्रियांक खरगे ने किया फैसले का बचाव, बीजेपी नेताओं को दिए इस्तीफे की चुनौती; हाईकोर्ट में PIL दायर
कर्नाटक सरकार द्वारा सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के गान को केवल पहले दो छंदों तक सीमित रखने के फैसले पर राजनीतिक घमासान मच गया है। इस बीच, कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने सरकार के इस फैसले का जोरदार बचाव किया है और बीजेपी पर तीखा हमला बोला है।
प्रियांक खरगे के बयान और मुख्य बातें:
राष्ट्रीय हस्तियों के निर्णयों का हवाला: प्रियांक खरगे ने कहा कि राज्य सरकार का यह फैसला महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसी प्रमुख राष्ट्रीय हस्तियों के ऐतिहासिक निर्णयों के अनुरूप है।
बीजेपी नेताओं को खुली चुनौती: खरगे ने कर्नाटक बीजेपी के दो बड़े नेताओं बी.वाई. विजयेंद्र और आर. अशोक को खुली चुनौती दी है कि वे “बिना टेलीप्रॉम्प्टर या कागज में देखे” वंदे मातरम के सभी छंद गाकर दिखाएं। उन्होंने कहा, “…अगर वे ऐसा कर पाए, तो मैं अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा।”
नेहरू और टैगोर से बड़ा होने का सवाल: खरगे ने सवाल किया कि जो लोग सभी छंद गाने की मांग कर रहे हैं, क्या वे पंडित जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर से भी बड़े हो गए हैं? उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस पार्टी या सरकार को बीजेपी और आरएसएस से देशभक्ति का पाठ सीखने की कोई जरूरत नहीं है।
कर्नाटक सरकार का आदेश और बीजेपी का विरोध:
नया नियम: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने आदेश दिया है कि राज्य सरकार के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो अंतरों (छंदों) का ही गायन किया जाए। हालांकि, जिन कार्यक्रमों में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल शामिल होंगे, वहां यह नियम लागू नहीं होगा।
विपक्षी हमला: राज्य की विपक्षी पार्टी बीजेपी ने इस फैसले को ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ करार देते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है।
कर्नाटक हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर:
इस विवाद के बीच, मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। वकील गिरीश भारद्वाज द्वारा दाखिल इस याचिका में राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें केवल दो छंद गाने की बात कही गई है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह निर्देश केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) के 9 जुलाई 2026 के उस पत्र के विपरीत है, जिसमें सभी राज्यों को राष्ट्रीय गीत से संबंधित आदेशों का “सख्ती से पालन” करने को कहा गया था। केंद्र के अनुसार, वंदे मातरम का आधिकारिक रूप छह छंदों वाली पूरी रचना है।
दूसरी ओर, कांग्रेस कार्य समिति ने 19 अगस्त को अपने 1937 के ऐतिहासिक प्रस्ताव का पालन करते हुए पार्टी कार्यक्रमों में केवल दो छंद ही गाने का फैसला किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर गर्माहट बढ़ा दी है।
