राजनीति

मॉनसून सत्र का पहला दिन: डिंपल यादव समेत सपा सांसद हिरासत में, संसद भवन में राहुल-अखिलेश और प्रियंका की हाई-लेवल बैठक

मॉनसून सत्र का पहला दिन: डिंपल यादव समेत सपा सांसद हिरासत में, संसद भवन में राहुल-अखिलेश और प्रियंका की हाई-लेवल बैठक

​NEET पेपर लीक और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आंदोलन को लेकर मचे देशव्यापी बवाल के बीच संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। मॉनसून सत्र का पहला दिन पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ने के बाद संसद भवन परिसर में विपक्षी खेमे की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई।

​इस बैठक में समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हुए। CJP के प्रदर्शन, संसद की रणनीतियों और उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों के त्रिकोण को देखते हुए इस मुलाकात को अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक माना जा रहा है। एनडीटीवी (NDTV) से बातचीत में अखिलेश यादव ने पुष्टि की कि बैठक में वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य के सभी प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई है।

​सपा सांसदों का ‘संसद से जंतर-मंतर’ मार्च, डिंपल यादव हिरासत में

​समाजवादी पार्टी ने NEET पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन को अपना खुला समर्थन दे दिया है। सोमवार को सपा सांसदों के एक बड़े समूह ने हाथों में बैनर-तख्तियां लेकर संसद भवन से जंतर-मंतर की ओर मार्च निकाला।

​जैसे ही सपा सांसद डिंपल यादव और उनके साथी जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे, वहां माहौल और गरमा गया। कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने सांसद डिंपल यादव समेत कई अन्य सपा सांसदों को कुछ देर के लिए हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद विपक्ष का गुस्सा और भड़क गया है, जिससे साफ है कि इस सत्र में सरकार पर दबाव कम होने वाला नहीं है।

​राहुल-अखिलेश-प्रियंका की बैठक के तीन बड़े सियासी मायने

​बैठक को लेकर कांग्रेस और सपा भले ही औपचारिक तौर पर इसे ‘सामान्य मुलाकात’ बता रहे हों, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके गहरे मायने निकाले जा रहे हैं:

​यूपी विधानसभा चुनाव पर नजर: बैठक में प्रियंका गांधी की मौजूदगी इस बात का साफ संकेत है कि दोनों दलों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से रणनीति बुनना शुरू कर दिया है। अखिलेश यादव ने एनडीटीवी से बातचीत में दोहराया कि यूपी में INDIA गठबंधन पहले भी था और आगामी विधानसभा चुनाव भी गठबंधन पूरी मजबूती के साथ लड़ेगा।

​संसद में ‘नंबर टू’ की ताकत: कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी ही संसद में INDIA अलायंस (विपक्ष) का दूसरा सबसे बड़ा घटक दल है। ऐसे में राहुल और अखिलेश का एक साथ बैठना सरकार के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता को और धार देता है।

​मुद्दों पर साझा घेराबंदी: विपक्ष की रणनीति एकदम स्पष्ट है—वह सरकार को नीट (NEET) पेपर लीक और अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा/चंदा चोरी के मुद्दों पर पूरी तरह घेरना चाहता है। इन दोनों ही विषयों पर काम रोको प्रस्ताव (Adjournment Motion) भी दिए जा चुके हैं।

​परिसीमन बिल (Delimitation Bill) पर होगी विपक्षी एकजुटता की असली परीक्षा

​फिलहाल संसद के दोनों सदनों में नीट और चंदा चोरी को लेकर गतिरोध बना हुआ है। यदि संसद की कार्य मंत्रणा समिति (BAC) में सरकार और विपक्ष के बीच बहस के नियमों को लेकर कोई सहमति बनती है, तभी सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाएगी।

​हालांकि, जानकारों का मानना है कि विपक्ष की असली परीक्षा तब होगी जब सरकार सदन में ‘परिसीमन बिल’ लेकर आएगी। हालांकि सरकार ने इस सत्र के अपने आधिकारिक एजेंडे में इसे शामिल नहीं किया है, लेकिन रणनीतिकारों का मानना है कि जिस दिन भी यह बिल पटल पर रखा जाएगा, उसी दिन विपक्षी गठबंधन (INDIA Alliance) के अंतर्विरोध और उनकी एकजुटता की सबसे कड़ी परीक्षा होगी।

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