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चंपत राय के पद से हटने के बाद अयोध्या के BJP नेताओं ने की मुलाकात, दिल्ली में VHP की बैठक में हुए शामिल

चंपत राय के पद से हटने के बाद अयोध्या के BJP नेताओं ने की मुलाकात, दिल्ली में VHP की बैठक में हुए शामिल

​श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के पद से हटाए जाने के बाद चंपत राय सोमवार को दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व हिंदू परिषद (VHP) की प्रबंध समिति की महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया। हालांकि, इस बैठक से पहले अयोध्या जिले के भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सभी पांचों विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्ष और मेयर सहित कई बड़े नेताओं ने उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली के राजनीतिक और धार्मिक हलकों में कयासों का दौर शुरू हो गया है।

​भले ही आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात को केवल एक ‘शिष्टाचार भेंट’ (Courtesy Meet) बताया जा रहा है, लेकिन चंपत राय के पद छोड़ने के तुरंत बाद हुई इस सामूहिक मुलाकात को राजनीतिक विश्लेषक बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

​मुलाकात में शामिल रहे अयोध्या के ये दिग्गज नेता

​सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में अयोध्या जिले के लगभग सभी शीर्ष जनप्रतिनिधि शामिल थे:

​वेद प्रकाश गुप्ता (विधायक, अयोध्या नगर)

​रामचंद्र यादव (विधायक, रुदौली)

​अभय सिंह (विधायक, गोसाईगंज)

​चंद्रभान पासवान (विधायक, मिल्कीपुर)

​अमित सिंह चौहान (विधायक, बीकापुर)

​गिरीश पति त्रिपाठी (महापौर/मेयर, अयोध्या)

​रोहित सिंह (जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह के पति)

​इन मुद्दों पर हुई चर्चा (सूत्रों के अनुसार)

​हालांकि नेताओं या ट्रस्ट की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि इस बैठक के दौरान अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े निम्नलिखित अहम विषयों पर बातचीत हुई:

​श्रद्धालुओं की सुविधाएं: अयोध्या आने वाले भक्तों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए उन्हें बेहतर सुविधाएं देने पर चर्चा हुई।

​शहर की व्यवस्थाएं: अयोध्या में यातायात (ट्रैफिक), स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने को लेकर विचार-विमर्श किया गया।

​सांस्कृतिक वातावरण: राम मंदिर के आसपास तेजी से विकसित हो रहे धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को लेकर भी नेताओं ने चंपत राय से मार्गदर्शन लिया।

​क्यों तेज हैं राजनीतिक चर्चाएं?

​चंपत राय राम जन्मभूमि आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं। ट्रस्ट के महासचिव के रूप में मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया, पत्थरों की नक्काशी से लेकर प्राण प्रतिष्ठा की व्यवस्थाओं तक में उनकी केंद्रीय भूमिका थी। यही कारण है कि पद से हटने के बावजूद उनके प्रभाव में कोई कमी नहीं दिखी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या इस मुलाकात के पीछे कोई नई संगठनात्मक रणनीति या भविष्य का बड़ा फैसला छिपा है, हालांकि अभी तक किसी भी स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

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