मांसपेशियों की कमजोरी से साढ़े तीन गुना बढ़ता है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा, नई रिसर्च में खुलासा
मांसपेशियों की कमजोरी से साढ़े तीन गुना बढ़ता है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा, नई रिसर्च में खुलासा
सिडनी: टाइप-2 डायबिटीज को लेकर हुए एक नए और चौंकाने वाले अध्ययन में सामने आया है कि इस बीमारी का खतरा केवल बढ़ते वजन या मोटापे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मांसपेशियों (Muscles) की कमजोरी भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में किए गए एक शोध के अनुसार, जिन लोगों के शरीर में अतिरिक्त चर्बी के साथ-साथ मांसपेशियां कमजोर होती हैं, उनमें डायबिटीज का खतरा काफी अधिक होता है। यह शोध प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल ‘डायबिटीज केयर’ में प्रकाशित हुआ है।
14 वर्षों तक 4.8 लाख लोगों पर हुआ अध्ययन
कर्टिन स्कूल ऑफ पॉपुलेशन हेल्थ और कर्टिन एनेबल इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने करीब 4.8 लाख वयस्कों के स्वास्थ्य आंकड़ों का 14 वर्षों तक गहन विश्लेषण किया। शोध की शुरुआत में इन सभी लोगों को डायबिटीज नहीं था। अध्ययन में पाया गया कि मोटापा और मांसपेशियों की कमजोरी के एक साथ होने की स्थिति, जिसे ‘सार्कोपेनिक ओबेसिटी’ कहा जाता है, से पीड़ित लोगों में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में साढ़े तीन गुना से भी अधिक था।
जोखिम के आंकड़े (मुख्य बिंदु):
सार्कोपेनिक ओबेसिटी बनाम सामान्य मोटापा: सार्कोपेनिक ओबेसिटी से पीड़ित लोगों में केवल मोटापे से ग्रस्त लोगों की तुलना में डायबिटीज का खतरा 19 प्रतिशत अधिक पाया गया।
सार्कोपेनिक ओबेसिटी बनाम केवल कमजोरी: केवल कम मांसपेशी द्रव्यमान या कमजोरी वाले लोगों की तुलना में यह जोखिम 91 प्रतिशत अधिक था।
10 वर्षों का प्रभाव: सार्कोपेनिक ओबेसिटी वाले करीब 15% लोगों में 10 साल के भीतर डायबिटीज विकसित हुई, जबकि केवल मोटापे से ग्रस्त लोगों में यह आंकड़ा 11% और स्वस्थ लोगों में महज 3% रहा।
सिर्फ BMI या वजन देखना काफी नहीं
अध्ययन के प्रमुख लेखक झोंगयांग गुआन के अनुसार, यह शोध इस पुरानी धारणा को चुनौती देता है कि डायबिटीज का खतरा केवल शरीर के वजन से तय होता है। वजन के साथ-साथ मांसपेशियों की ताकत और मात्रा पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है। शोध में यह भी देखा गया कि यह संबंध महिलाओं और 60 वर्ष से कम उम्र के वयस्कों में अधिक मजबूत था।
शोध के वरिष्ठ प्रमुख प्रोफेसर मारियो सिएर्वो ने कहा कि डायबिटीज से बचाव के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि इस गंभीर बीमारी के खतरे को समय रहते कम किया जा सके।
