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एक्टर गोविंदा की दमदार वापसी: फिल्म ‘रूपा’ से करेंगे कमबैक, संघर्ष और ’14’ नंबर के लकी कनेक्शन पर कही बड़ी बातें

एक्टर गोविंदा की दमदार वापसी: फिल्म ‘रूपा’ से करेंगे कमबैक, संघर्ष और ’14’ नंबर के लकी कनेक्शन पर कही बड़ी बातें

​90 के दशक में अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग, बेजोड़ डांस और दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले ‘चीची’ यानी गोविंदा लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनकी आने वाली फिल्म ‘रूपा’ के जरिए वे एक बार फिर दर्शकों का मनोरंजन करने आ रहे हैं।

​सोमवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोविंदा ने अपनी इस नई फिल्म, फिल्म इंडस्ट्री द्वारा नजरअंदाज किए जाने और अपने जीवन के संघर्षों पर खुलकर बात की।

​”शायद मेरी किस्मत में नकारा जाना ही लिखा था”

​लंबे समय तक फिल्मों से दूर रहने और इंडस्ट्री में उपेक्षित महसूस करने के सवाल पर गोविंदा ने बेहद संजीदगी से जवाब दिया। उन्होंने कहा:

​”शायद मेरी किस्मत में यही लिखा था कि फिल्म इंडस्ट्री मुझे नजरअंदाज करे, ताकि मैं पहले से ज्यादा मजबूती के साथ वापसी कर सकूं। कई बार लोगों ने मुझे नकारा और कहा कि अब यह फिल्मों में नजर नहीं आएगा, लेकिन मैं हर बार एक नई शुरुआत करता हूं। मैं प्रार्थना करता हूं कि जो मैंने सोचा है और जिसकी लोग कल्पना भी नहीं कर सकते, वह इस फिल्म के जरिए सच हो जाए।”

​गोविंदा ने बताया कि फिल्म ‘रूपा’ खास तौर पर युवाओं के लिए है। जब वे इसे सिनेमाघरों में देखेंगे, तो उनके सपनों को एक नई उड़ान मिलेगी।

​अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) और ’14’ नंबर का जादुई कनेक्शन

​बातचीत के दौरान गोविंदा ने अपनी जिंदगी में अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) के महत्व का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ’14’ नंबर उनके जीवन में बेहद लकी और चमत्कारिक रहा है:

​लकी नंबर 14: गोविंदा ने बताया कि उनका नाम भी न्यूमरोलॉजी के हिसाब से ही रखा गया है।

​14 की उम्र और 14 फिल्में: जब वे महज 14 साल के थे, तभी से उनका इस पर विश्वास मजबूत हो गया था। भगवान की ऐसी कृपा रही कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में महज एक हफ्ते के भीतर 14 फिल्में साइन की थीं।

​14 साल का स्टारडम: इसके बाद उन्होंने लगातार 14 वर्षों तक फिल्म इंडस्ट्री में बेताज बादशाह की तरह ‘सुपर-स्टारडम’ का आनंद लिया।

​14वीं लोकसभा: अभिनय के बाद जब उन्होंने राजनीति का रुख किया, तो वे 14वीं लोकसभा में सांसद चुनकर आए।

​14 साल का संघर्ष: राजनीति और फिल्मों से दूरी के बीच उन्होंने जीवन में 14 साल तक कड़ा संघर्ष भी देखा।

​गोविंदा ने उम्मीद जताते हुए कहा कि वह कभी भी 5 साल से ज्यादा खाली बैठने का इंतजार नहीं कर सकते थे, और अब ‘रूपा’ के जरिए उनका नया सफर यहीं से शुरू हो रहा है।

​”बिना सिगरेट, शराब और नॉन-वेज के हीरो कैसे बनोगे?”

​अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष को याद करते हुए गोविंदा ने एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वे अपने गांव में लोगों से कहते थे कि वे बड़े होकर हीरो बनेंगे, तो लोग उनका मजाक उड़ाते थे।

​लोग उनसे कहते थे, “तुम न तो सिगरेट पीते हो, न शराब पीते हो, न नॉन-वेज खाते हो और न ही लहसुन-प्याज खाते हो। फिर भला तुम हीरो कैसे बन सकते हो?”

​गोविंदा ने आगे कहा, “लोग कहते थे कि अगर तुम डर के मारे भागोगे, तो साधु बन जाओगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैंने वही किया जो मेरी मां ने मेरे लिए सोचा था।” उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में बच्चों और युवाओं के लिए ‘रूपा’ जैसी फिल्में बनना बेहद जरूरी है, जिससे उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले।

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