हर्षिल में तेलगाड़ नदी ने फिर बढ़ाई चिंता: आपदा के खतरे को देखते हुए ‘निम’ (NIM) के विशेषज्ञ करेंगे वैज्ञानिक आकलन
हर्षिल में तेलगाड़ नदी ने फिर बढ़ाई चिंता: आपदा के खतरे को देखते हुए ‘निम’ (NIM) के विशेषज्ञ करेंगे वैज्ञानिक आकलन
उत्तरकाशी/हर्षिल:
विगत वर्ष आई भीषण आपदा के जख्म अभी पूरी तरह भरे भी नहीं थे कि हर्षिल क्षेत्र में तेलगाड़ नदी को लेकर एक बार फिर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। सेना की छावनी, स्थानीय आवासीय क्षेत्रों और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण गंगोत्री हाईवे की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के विशेषज्ञों से तेलगाड़ नदी के मुहाने और उसके उद्गम स्थल ‘सतगडार क्षेत्र’ का स्थलीय निरीक्षण कराने का निर्णय लिया है। आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से इसके लिए ‘निम’ को पत्र भेजकर विशेषज्ञ टीम भेजने का अनुरोध किया गया है।
सेना ने जताई मलबे के एकत्र होने की आशंका
सेना के उच्च अधिकारियों ने जिला प्रशासन को इनपुट दिया है कि तेलगाड़ नदी के ऊपरी मुहाने पर भारी मात्रा में मलबा जमा होने की आशंका है।
बड़ा खतरा: यदि मानसून के दौरान लगातार भारी बारिश होती है, तो यह मलबा एक साथ बहकर नीचे आ सकता है।
संभावित नुकसान: ऐसा होने पर सेना की छावनी, हर्षिल गांव और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग गंभीर खतरे की जद में आ सकते हैं।
अगस्त 2025 की आपदा की यादें हुईं ताजा
यह चिंता बेवजह नहीं है। पिछले ही साल अगस्त 2025 में धराली के बाद तेलगाड़ नदी में आई विनाशकारी आपदा ने भारी तबाही मचाई थी:
आपदा के दौरान करीब 20 फीट ऊंचा मलबा सीधे सेना के कैंप तक घुस गया था।
इस हादसे में सेना के शिविर को भारी नुकसान पहुंचा था और 9 जवान लापता हो गए थे (हालांकि कई जवानों को सुरक्षित रेस्क्यू भी कर लिया गया था)।
मलबे के कारण भागीरथी नदी का प्रवाह रुक गया था, जिससे वहां अस्थायी झील बन गई थी।
मानसून की शुरुआत के साथ ही मिलने लगे खतरे के संकेत
इस वर्ष भी मानसून की शुरुआत होते ही खतरे के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। बीते शुक्रवार को तेलगाड़ नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन पुल की निर्माण सामग्री मलबे की चपेट में आकर दब गई। इस घटना के बाद से ही सेना और प्रशासन की रातों की नींद उड़ी हुई है।
वैज्ञानिक रिपोर्ट के बाद बनेगी सुरक्षा की कार्ययोजना
जिलाधिकारी का वक्तव्य:
“सेना की ओर से मिली सूचना और मानसून के मद्देनजर ‘निम’ के विशेषज्ञों से विस्तृत स्थलीय अध्ययन कराने का निर्णय लिया गया है। संभावना है कि इसी सप्ताह निम की विशेषज्ञ टीम तेलगाड़ और सतगडार क्षेत्र का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के दौरान मलबे की स्थिति, भूस्खलन की आशंका और भविष्य में संभावित खतरे का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद क्षेत्र में आवश्यक सुरक्षात्मक और आपदा न्यूनीकरण संबंधी कार्यों की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि हर्षिल, सेना की छावनी और गंगोत्री हाईवे को सुरक्षित रखा जा सके।”
— प्रशांत आर्य, जिलाधिकारी
