धर्म

जगन्नाथ रथ यात्रा: अधूरी मूर्तियों से लेकर हवा के विपरीत लहराते ध्वज तक, वो रहस्य जिन्हें विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया

ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा विश्व प्रसिद्ध है। यह न केवल आस्था का एक विशाल केंद्र है, बल्कि अपने भीतर कई ऐसे रहस्य समेटे हुए है जिनके आगे आधुनिक विज्ञान और तर्क भी नतमस्तक नजर आते हैं।

​अधूरी मूर्तियों से लेकर मंदिर से जुड़े अनोखे चमत्कारों तक, इस पावन उत्सव और मंदिर के कुछ सबसे बड़े अनसुने रहस्य निम्नलिखित हैं:

जगन्नाथ रथ यात्रा: अधूरी मूर्तियों से लेकर हवा के विपरीत लहराते ध्वज तक, वो रहस्य जिन्हें विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया

​आध्यात्मिक डेस्क: हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के इस महापर्व के साथ कुछ ऐसे विस्मयकारी और अनसुलझे रहस्य जुड़े हैं, जो सदियों से शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए पहेली बने हुए हैं।

​1. आखिर क्यों अधूरी हैं भगवान जगन्नाथ की मूर्तियां?

​पुरी मंदिर में स्थापित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां पूर्ण नहीं हैं। उनके हाथ-पैर अधूरे बने हुए हैं। इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प पौराणिक कथा है।

​विश्वकर्मा की शर्त: माना जाता है कि राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान विष्णु के आदेश पर इन मूर्तियों का निर्माण कराने के लिए देव-शिल्पी विश्वकर्मा को बुलाया था। विश्वकर्मा ने एक शर्त रखी थी कि वे बंद कमरे में मूर्तियां बनाएंगे और काम पूरा होने से पहले कोई भी कमरा नहीं खोलेगा। लेकिन मूर्तियों के बनने की आवाज बंद होने पर राजा की उत्सुकता बढ़ गई और उन्होंने कमरा खोल दिया। शर्त टूटने के कारण विश्वकर्मा अंतर्ध्यान हो गए और मूर्तियां हमेशा के लिए अधूरी रह गईं। भगवान ने इसे ही अपना स्वरूप मानकर स्वीकार किया।

​2. हवा के विपरीत दिशा में लहराता है मंदिर का ध्वज

​सामान्य भौतिकी (Physics) का नियम है कि कपड़ा या ध्वज उसी दिशा में लहराता है जिस तरफ हवा चल रही हो। लेकिन पुरी के जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा लाल ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। विज्ञान आज तक इस बात का सटीक कारण नहीं बता पाया है। इसके अलावा, इस ध्वज को हर दिन मंदिर के पुजारी 45 मंजिला इमारत जितनी ऊंचाई पर उलटा चढ़कर बदलते हैं।

​3. ‘नव कलेवर’ और धड़कता हुआ ‘ब्रह्म पदार्थ’

​हर 12 या 19 साल में जब आषाढ़ महीने में दो महीने (मलमास) आते हैं, तब भगवान की मूर्तियों को बदला जाता है, जिसे ‘नव कलेवर’ परंपरा कहा जाता है।

​जब पुरानी मूर्तियों को हटाकर नई मूर्तियां स्थापित की जाती हैं, तो पूरे पुरी शहर की बिजली काट दी जाती है।

​मंदिर के चारों तरफ घोर अंधेरा कर दिया जाता है और मंदिर के अंदर केवल उस मुख्य पुजारी को जाने की अनुमति होती है जिसकी आंखों पर पट्टी बंधी होती है और हाथों में दस्ताने होते हैं।

​पुरानी मूर्ति में से ‘ब्रह्म पदार्थ’ निकालकर नई मूर्ति में डाला जाता है। पुजारियों के अनुसार, यह पदार्थ आज भी किसी जीवित दिल की तरह धड़कता महसूस होता है। माना जाता है कि यह भगवान कृष्ण का हृदय है।

​4. मंदिर की रसोई और ‘महाप्रसाद’ का अनोखा चमत्कार

​जगन्नाथ मंदिर में स्थित रसोई को दुनिया की सबसे बड़ी रसोई माना जाता है, जहां भगवान के लिए ‘महाप्रसाद’ तैयार होता है। यहां भोजन पकाने की तकनीक विज्ञान को हैरान करती है:

​मिट्टी के 7 बर्तनों को एक के ऊपर एक (ऊपर की ओर) रखा जाता है।

​अचरज की बात यह है कि सबसे नीचे वाले बर्तन का खाना पहले नहीं पकता, बल्कि सबसे ऊपर रखे सातवें बर्तन का खाना सबसे पहले पकता है, और फिर क्रम से नीचे वाले बर्तनों का।

​मंदिर में हर दिन हजारों या लाखों भक्त आएं, प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और जैसे ही मंदिर के कपाट बंद होने का समय आता है, प्रसाद अपने आप समाप्त हो जाता है।

​5. समुद्र की लहरों की मौन आवाज

​जगन्नाथ मंदिर समुद्र के ठीक किनारे स्थित है। लेकिन जैसे ही आप मंदिर के मुख्य द्वार (सिंहद्वार) के अंदर पहला कदम रखते हैं, समुद्र की लहरों की तेज आवाज पूरी तरह से गायब हो जाती है। वहीं, जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर आते हैं, लहरों की आवाज फिर से सुनाई देने लगती है। स्थानीय लोग इसे देवी सुभद्रा की इच्छा से जुड़ा रहस्य मानते हैं।

​अन्य विस्मयकारी तथ्य: इस विशाल मंदिर के शिखर पर सुदर्शन चक्र लगा है, जिसे आप पुरी के किसी भी कोने से देखें, उसका मुख हमेशा आपकी तरफ ही दिखाई देता है। इसके अलावा, दिन के किसी भी समय इस भव्य मंदिर के मुख्य गुंबद की परछाई (Shadow) जमीन पर कभी नहीं बनती।

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