ईरान-अमेरिका तनाव: ‘हमें अमेरिका पर जीरो विश्वास, मुकरा तो युद्ध को तैयार’ — ईरानी संसद स्पीकर का बड़ा बयान
ईरान-अमेरिका तनाव: ‘हमें अमेरिका पर जीरो विश्वास, मुकरा तो युद्ध को तैयार’ — ईरानी संसद स्पीकर का बड़ा बयान
तेहरान/वाशिंगटन: शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देशों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने एक बड़ा और तीखा बयान दिया है। गालीबाफ ने स्पष्ट किया है कि बार-बार भरोसा टूटने के बाद भी ईरान अमेरिका के साथ बातचीत क्यों कर रहा है, साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका शर्तों से मुकरता है, तो ईरान ‘फुल-स्केल डिफेंस’ (पूर्ण रक्षात्मक युद्ध) के लिए पूरी तरह तैयार है।
”अमेरिका पर ईरान को है जीरो विश्वास”
मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने इंडोनेशिया की पीपल्स कंसल्टेटिव असेंबली के स्पीकर अहमद मुजानी के साथ हुई बैठक के बाद अपने आधिकारिक टेलीग्राम पोस्ट पर इस बात की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बीते 17 जून को हुई शांति वार्ता के दौरान उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से सीधे तौर पर यह बात कह दी थी।
गालीबाफ ने कहा:
”मैंने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को साफ-साफ कह दिया था कि हमारा आप पर भरोसा जीरो है। मेरी नजर में, सिर्फ वे लोग ही अमेरिका के साथ बातचीत कर सकते हैं जो जंग के लिए तैयार हों। ईरान ने अपने देश की रक्षा की तैयारियों को कभी नहीं रोका है। जब भी अमेरिका किसी भी समझौते से मुकरेगा, हम फुल-स्केल डिफेंस के लिए तैयार रहेंगे। हम उनके खिलाफ मजबूती से खड़े रहेंगे और ईरान के अधिकारों के लिए लड़ेंगे।”
डोनाल्ड ट्रंप सीजफायर को मान चुके हैं “खत्म”
ईरानी स्पीकर का यह कड़ा रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आया है, जिसमें ट्रंप ने युद्धविराम (सीजफायर) के खत्म होने की बात कही थी। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान जारी कर कहा था:
”इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने हमसे ‘बातचीत’ जारी रखने के लिए कहा है। हम ऐसा करने के लिए राजी हो गए हैं, लेकिन अमेरिका ने उन्हें स्पष्ट बता दिया है कि सीजफायर अब खत्म हो चुका है।”
दो हफ्ते भी नहीं चल सका शांति समझौता
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच पिछले महीने 17 जून 2026 को ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। लेकिन दोनों देशों के बीच यह शांति दो हफ्ते भी नहीं टिक सकी। 25 जून 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक जहाज पर हुए हमले के बाद सीजफायर टूट गया और दोनों देशों के बीच एक बार फिर सैन्य वार-पलटवार का सिलसिला शुरू हो गया, जिसने क्षेत्र में युद्ध के बादलों को दोबारा गहरा कर दिया है।
