अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में अप्रत्यक्ष वार्ता जारी; कतर और पाकिस्तान कर रहे हैं मध्यस्थता
अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में अप्रत्यक्ष वार्ता जारी; कतर और पाकिस्तान कर रहे हैं मध्यस्थता
दोहा/इस्लामाबाद: कतर की राजधानी दोहा में बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील अप्रत्यक्ष बातचीत (Indirect Talks) जारी रही। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने एक आधिकारिक सूत्र के हवाले से बताया कि दोनों देशों के प्रतिनिधि राजनयिक मर्यादाओं के तहत आमने-सामने नहीं बैठ रहे हैं। यह पूरी बैठक बंद कमरे में आयोजित की जा रही है, जहां कतर और पाकिस्तान के राजनयिक मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों के संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं।
इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य 17 जून को इस्लामाबाद में हस्ताक्षरित हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को धरातल पर लागू करना है, जिसमें ईरान की फ्रीज (जब्त) की गई संपत्तियों की बहाली और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) की समुद्री सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं।
सीधे संवाद से अमेरिका और ईरान का इनकार
कतर ने मंगलवार को ही इस बात की आधिकारिक पुष्टि कर दी थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर दोहा पहुंच चुके हैं। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरानी अधिकारियों से सीधे मुलाकात करने के बजाय केवल मध्यस्थों (कतर और पाकिस्तान) से ही बात करेगा।
इस वार्ता को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के अपने-अपने दावे हैं:
अमेरिका का पक्ष: वाशिंगटन का कहना है कि दोहा में हो रही यह कूटनीतिक हलचल इस्लामाबाद एमओयू को लागू करने की एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
ईरान का पक्ष: ईरान ने साफ किया है कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की सीधी वार्ता एजेंडे में शामिल नहीं है और न ही इसकी कोई संभावना है।
ईरान की पांच शर्तें; $6 अरब की संपत्ति पर फंसा पेंच
कतर के प्रवक्ता अल-अंसारी के अनुसार, ईरान की लगभग छह अरब अमेरिकी डॉलर ($6 Billion) की फ्रीज की गई संपत्ति अभी तक तेहरान को हस्तांतरित नहीं की गई है, जो इस वार्ता का एक बड़ा वित्तीय बिंदु है।
इसी बीच, ईरानी संसद के अध्यक्ष और ईरान की वार्ता टीम के प्रमुख मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने सरकारी टीवी चैनल (IRIB) को दिए इंटरव्यू में तेहरान का रुख कड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि हालिया स्विट्जरलैंड दौरे का मुख्य उद्देश्य एमओयू की बुनियादी शर्तों को मनवाना था। जब तक अमेरिका निम्नलिखित 5 शुरुआती शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक ईरान किसी अंतिम समझौते पर आगे नहीं बढ़ेगा:
सभी मोर्चों पर युद्ध की पूरी तरह समाप्ति।
लेबनान में स्थायी शांति की बहाली।
ईरान पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को हटाना।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए फिर से खोलना।
ईरानी कच्चे तेल (Crude Oil) के निर्यात के लिए अमेरिका द्वारा दी जाने वाली छूट को जारी रखना और फ्रीज संपत्तियां वापस लौटाना।
लेबनान शांति के लिए बनेगी त्रिपक्षीय संयुक्त समिति
कालीबाफ ने मध्य-पूर्व में जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ी प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईरान, अमेरिका और लेबनान ने मिलकर एक ‘संयुक्त समिति’ (Joint Committee) बनाने पर सहमति व्यक्त की है।
इस त्रिपक्षीय समिति का मुख्य कार्य क्षेत्र में युद्धविराम (Ceasefire) लागू कराना, लेबनान में युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना और उसकी संप्रभुता (Sovereignty) की रक्षा सुनिश्चित करना होगा। इस समिति के लिए ईरान और अमेरिका ने अपने-अपने प्रतिनिधियों के नामों को अंतिम रूप दे दिया है।
ईरानी वार्ता प्रमुख ने अंत में स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि ईरान एक तरफ जहां बातचीत और कूटनीति के रास्ते का सम्मान करता है, वहीं देश की सुरक्षा और संप्रभुता के आड़े आने वाली ताकतों को अपनी सैन्य शक्ति से जवाब देने से भी पीछे नहीं हटेगा।
