चमोली चंदा/विवाद मामले में बड़ी कार्रवाई: कर्णप्रयाग के दोनों मुकदमे हरिद्वार ट्रांसफर; स्थानीय पुलिस के आचरण की जांच करेंगे DIG
चमोली चंदा/विवाद मामले में बड़ी कार्रवाई: कर्णप्रयाग के दोनों मुकदमे हरिद्वार ट्रांसफर; स्थानीय पुलिस के आचरण की जांच करेंगे DIG
देहरादून/कर्णप्रयाग: उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग में स्थानीय व्यापारियों और निहंग सिख श्रद्धालुओं के बीच हुए विवाद ने अब एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस मामले में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने दोनों पक्षों की ओर से दर्ज मुकदमों (क्रॉस एफआईआर) की जांच चमोली जिले से हटाकर हरिद्वार स्थानांतरित कर दी है। इसके साथ ही, स्थानीय पुलिस के आचरण और सिख युवकों को कथित रूप से बिना पगड़ी अदालत में पेश करने के आरोपों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
पंजाब के सांसद और विधायकों ने की DGP से मुलाकात
मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को पंजाब से आए एक उच्च स्तरीय सिख प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में पंजाब के लोकसभा सांसद सरबजीत सिंह खालसा और शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली समेत कई प्रमुख नेता शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी के समक्ष अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं:
एकतरफा कार्रवाई का आरोप: उनका दावा है कि यात्रा पर जा रहे चार निहंग सिख युवकों के साथ पहले मारपीट की गई और बाद में स्थानीय प्रभाव के चलते उन पर एकतरफा गंभीर धाराएं लगा दी गईं।
धार्मिक भावनाएं आहत होने का मुद्दा: प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सिख युवकों को कथित तौर पर बिना पगड़ी के अदालत में पेश किया गया, जिससे देश भर के सिख समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
धाराओं की समीक्षा की मांग: अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने धारा 307 (हत्या का प्रयास) और छेड़छाड़ जैसे आरोपों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इनके समर्थन में कोई चिकित्सीय या ठोस सबूत नहीं हैं, इसलिए इन्हें हटाया जाना चाहिए और युवकों को जल्द रिहा किया जाए।
पुलिस मुख्यालय का बड़ा फैसला: जांच अब हरिद्वार एसएसपी की निगरानी में
सिख संगठनों की चिंताओं और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने त्वरित निर्णय लेते हुए चमोली से जांच को पूरी तरह बाहर कर दिया है।
क्रॉस केस दर्ज: पुलिस ने बताया कि घायल सिख श्रद्धालु के पिता की शिकायत पर मारपीट करने वाले स्थानीय अज्ञात लोगों के खिलाफ भी 20 जून को कर्णप्रयाग थाने में क्रॉस एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
तटस्थ जांच के लिए ट्रांसफर: कर्णप्रयाग थाने में दर्ज दोनों मुकदमों की जांच अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर की सीधी निगरानी में ट्रांसफर की गई है, ताकि स्थानीय दबाव से मुक्त होकर पारदर्शी तरीके से तफ्तीश हो सके।
स्थानीय पुलिस के व्यवहार की जांच करेंगे DIG
सिख प्रतिनिधिमंडल द्वारा स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और सिखों की धार्मिक मर्यादाओं के कथित उल्लंघन को लेकर लगाए गए आरोपों को भी मुख्यालय ने बेहद गंभीरता से लिया है। इन आरोपों की जांच डीआईजी (DIG) यशवंत सिंह को सौंपी गई है। उन्हें पूरे मामले की गहन समीक्षा कर दो सप्ताह (14 दिन) के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
”श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता”: आईजी गढ़वाल
मामले पर गढ़वाल रेंज के महानिरीक्षक (IG) राजीव स्वरूप ने आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा:
”उत्तराखंड पुलिस सभी समुदायों की धार्मिक भावनाओं का गहरा सम्मान करती है और कानून के दायरे में निष्पक्ष कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। श्री हेमकुंड साहिब यात्रा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यात्रा के दौरान देश-विदेश से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षा, सम्मान और सुविधा सुनिश्चित करना उत्तराखंड पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
फिलहाल, यह मामला अब महज एक स्थानीय आपराधिक झड़प न रहकर कानून-व्यवस्था, धार्मिक संवेदनशीलता और कूटनीतिक निष्पक्षता का विषय बन चुका है। अब सभी पक्षों की नजरें हरिद्वार पुलिस की आगामी जांच और डीआईजी की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
