झारखंड राज्यसभा चुनाव: पर्याप्त संख्या बल के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की हार, ‘भीतरघात’ के आरोपों से गरमाई सियासत
झारखंड राज्यसभा चुनाव: पर्याप्त संख्या बल के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की हार, ‘भीतरघात’ के आरोपों से गरमाई सियासत
रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने सूबे की राजनीतिक हलचल को चरम पर पहुंचा दिया है। विधानसभा में स्पष्ट और पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद महागठबंधन (इंडिया ब्लॉक) के दूसरे उम्मीदवार की हार से हर कोई हैरान है। शनिवार को कांग्रेस भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने इस करारी शिकस्त के बाद ‘भीतरघात’ (क्रॉस वोटिंग) की आशंका जताते हुए मामले की उच्च स्तरीय और कड़ी समीक्षा करने की मांग की है।
कांग्रेस ने इस अप्रत्याशित हार के पीछे सीधे तौर पर ‘बीजेपी के थैलीशाहों’ के पैसे के खेल को जिम्मेदार ठहराया है।
आंकड़ों का खेल: क्रॉस वोटिंग ने कैसे बिगाड़ा समीकरण?
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव हुआ था। नियमों के मुताबिक, एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की जरूरत थी। महागठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का मजबूत समर्थन था, जिससे दोनों सीटों पर उनकी जीत तय मानी जा रही थी। लेकिन नतीजों ने सबको चौंका दिया:
जेएमएम की जीत: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम को 30 वोट मिले और उन्होंने आसानी से जीत दर्ज की।
कांग्रेस की हार: कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को महज 20 वोट मिले और वे चुनाव हार गए।
निर्दलीय उम्मीदवार की बाजी: एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने पासा पलटते हुए 28 वोट हासिल किए और जीत दर्ज की, जबकि विधानसभा में एनडीए के पास केवल 24 विधायक थे।
अमान्य वोट: चुनाव के दौरान कुल 3 वोट अमान्य (रिजेक्ट) पाए गए, जिनमें दो बीजेपी और एक कांग्रेस का वोट शामिल था।
इस गणित से साफ है कि महागठबंधन के कई विधायकों ने पाला बदलकर निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की, जिससे कांग्रेस का खेल बिगड़ गया।
”विष भी पीना पड़े तो पी लेंगे, पर गठबंधन नहीं टूटेगा”
इस करारी हार और धोखे के बाद भी महागठबंधन के नेताओं ने एकजुटता का दावा किया है। झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने इस राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
”हमारा गठबंधन अटूट है। हमें इसके लिए विष भी पीना पड़े तो पी लेंगे, लेकिन इस पुराने गठबंधन के अस्तित्व पर कोई आंच नहीं आने देंगे। हम एक थे, एक हैं और एक ही रहेंगे।”
इसके साथ ही उन्होंने इस नाजुक वक्त पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की तरफ से आ रही बयानबाजी को अनुचित बताते हुए कहा कि ऐसे समय में सभी सहयोगियों को अनावश्यक बयानों से बचना चाहिए और राजद को भी इस मामले में अपना रुख साफ करना चाहिए।
बीजेपी का पलटवार: “सत्ता से चिपके रहने के लिए मलाई खा रही कांग्रेस”
कांग्रेस द्वारा लगाए गए खरीद-फरोख्त के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा पलटवार किया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि इतनी किरकिरी और दुर्गति होने के बाद भी कांग्रेस का सरकार में बने रहने का बयान कोई आश्चर्य पैदा नहीं करता, क्योंकि सत्ता से चिपके रहना कांग्रेस का स्वभाव है।
आदित्य साहू ने तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस कहती है कि वे कोई भी विष पीने को तैयार हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि कांग्रेस सरकार में रहकर मलाई खाने का काम कर रही है। इन जैसे दलों के कुशासन के कारण असली विष तो झारखंड की जनता को पीना पड़ रहा है।”
इस हार के बाद महागठबंधन के भीतर अविश्वास की खाई चौड़ी हो गई है और सभी सहयोगी दलों को अब अपने राजनीतिक भविष्य और रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करना होगा।
