दोस्ती, ईर्ष्या और धोखे की खूनी कहानी: इंटरनेशनल पैरा एथलीट चिराग त्यागी की दोस्त ने पीठ में गोली मारकर की हत्या
दोस्ती, ईर्ष्या और धोखे की खूनी कहानी: इंटरनेशनल पैरा एथलीट चिराग त्यागी की दोस्त ने पीठ में गोली मारकर की हत्या
गाजियाबाद: अपने करियर की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत हासिल करने के कुछ ही घंटों बाद, देश के उभरते हुए पैरा एथलीट चिराग त्यागी की उनके सबसे करीबी दोस्त ने गोली मारकर हत्या कर दी। चिराग अपने गरीब परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। घर में जिस चैंपियन बेटे के स्वागत और जश्न की तैयारी चल रही थी, वहां अब चीख-पुकार और मातम पसरा हुआ है।
कुछ ही दिन पहले, 24 वर्षीय चिराग बेंगलुरु में आयोजित ‘8वीं इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स इंटरनेशनल चैंपियनशिप’ में पोडियम पर खड़े थे। गर्व से देश के लिए गोल्ड और सिल्वर मेडल थामे चिराग ने एशियाई पैरा गेम्स (Asian Para Games) के लिए क्वालीफाई कर लिया था, जो उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना था।
साई उपवन में मिला शव, रूममेट ही निकला हत्यारा
चिराग त्यागी उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले एक असाधारण टी12 श्रेणी (दृष्टिबाधित – Visually Impaired) के धावक थे। शनिवार को उनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने का सपना बेरहमी से कुचल दिया गया। गाजियाबाद में हिंडन नदी के पास सुनसान ‘साई उपवन’ इलाके में चिराग का शव मिला, उनकी पीठ में गोली मारी गई थी।
इस मामले में तब बेहद चौंकाने वाला मोड़ आया, जब पुलिस जांच में हत्यारा कोई अजनबी नहीं, बल्कि उनका रूममेट, ट्रेनिंग पार्टनर और पिछले आठ साल से सबसे करीबी दोस्त साथी पैरा एथलीट यश खटीक निकला। यश ने खुद चिराग को गोली मारने की बात कबूल कर ली है।
”मैं घर आ रहा हूं…” — चिराग की आखिरी कॉल
मौत से कुछ घंटे पहले चिराग ने अपने माता-पिता को फोन कर बेहद खुशी से कहा था, “मैं घर आ रहा हूं।” चिराग के चाचा राजेश त्यागी ने बताया:
सुबह 08:10 बजे: चिराग ने परिवार को फोन कर बताया कि वह दोपहर 3:00 बजे तक घर पहुंच जाएगा।
कुछ देर बाद: चिराग का मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया, जिससे परिवार चिंतित हो गया।
दोपहर बाद: अपने लाडले का स्वागत करने के बजाय, परिवार को कोतवाली पुलिस का फोन आया, जिसने चिराग की हत्या की दुखद सूचना दी।
विश्वास पर बनी दोस्ती, कामयाबी की ईर्ष्या में चकनाचूर
लगभग एक दशक तक चिराग और यश ने अपनी जिंदगी का हर सुख-दुख साझा किया था। दोनों एक ही दृष्टिबाधित एथलेटिक्स वर्ग में रेस लड़ते थे, एक ही कमरे में रहते थे और पिछले पांच सालों से कठिन ट्रेनिंग सेशन्स के दौरान एक-दूसरे की ताकत बने हुए थे। चिराग को यश पर इस कदर अंधविश्वास था कि उन्होंने अपने बैंक खातों की गोपनीय जानकारी भी उसके साथ साझा कर रखी थी।
दस्तावेज़ विवाद या जलन? पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद बताया था कि खेल के दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification) को लेकर दोनों में विवाद हुआ था, जिसके चलते यश की खेल योग्यता रद्द हो गई थी और वह चिराग से नाराज था। हालांकि, चिराग के परिवार ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि चिराग ने कभी यश के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की थी। असल वजह चिराग को लगातार मिल रही बड़ी सफलताओं और मेडल से उपजी यश की बेहिसाब ईर्ष्या (जलन) थी।
बीमार पिता और मां के इकलौते सहारे थे चिराग
चिराग की मौत ने त्यागी परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दिया है। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान और परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी मां गृहिणी हैं और पिता एक टायर फैक्ट्री में पूर्व तकनीशियन थे, जो पिछले पांच महीनों से गंभीर दिमागी बीमारी और दौरों की समस्या से जूझ रहे हैं।
पिता के नाजुक स्वास्थ्य को देखते हुए चिराग ने हाल ही में उनसे काम छुड़वा दिया था और वादा किया था, “पापा, अब आप आराम करो, मेरा खेल करियर और मेरे मेडल हम सबका ख्याल रखेंगे।” चिराग अपने दम पर परिवार को गरीबी और तंगहाली से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे।
सीसीटीवी से खुला राज, पिस्तौल की तलाश जारी
पुलिस उपायुक्त (DCP) धवल जायसवाल के अनुसार, गाजियाबाद पुलिस को शनिवार तड़के करीब 3:00 बजे के बाद साई कुंज इलाके के पास एक अज्ञात शव पड़े होने की सूचना मिली थी। जांचकर्ताओं ने तुरंत इलाके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले, जिससे कड़ियां जुड़ती गईं और पुलिस सीधे यश खटीक तक पहुंच गई।
पूछताछ में यश ने कबूल किया कि उसने चिराग को एक सामान्य मुलाकात के बहाने उस सुनसान जगह पर बुलाया। जैसे ही चिराग आगे बढ़ा, यश ने पेशेवर दुश्मनी और जलन के चलते पीछे से उसकी पीठ में पिस्तौल से गोली दाग दी। गाजियाबाद पुलिस ने आरोपी यश खटीक को हिरासत में ले लिया है और हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्तौल बरामद करने के लिए दबिश दे रही है। पुलिस इस बात की भी तफ्तीश कर रही है कि क्या इस खूनी साजिश में कोई और भी शामिल था।
