ईरान-अमेरिका विवाद सुलझाने के लिए मदद को तैयार रूस: उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव बोले— “मांगेंगे मदद, तो बढ़ाएंगे हाथ, जबरन कुछ नहीं थोपेंगे”
ईरान-अमेरिका विवाद सुलझाने के लिए मदद को तैयार रूस: उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव बोले— “मांगेंगे मदद, तो बढ़ाएंगे हाथ, जबरन कुछ नहीं थोपेंगे”
मास्को: एक तरफ जहां बीजिंग में रूस और चीन के राष्ट्राध्यक्ष मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के संकट पर महामंथन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रूस ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा बयान दिया है। रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव (Sergei Ryabkov) ने स्पष्ट किया है कि मास्को (रूस) ईरान और अमेरिका के बीच चल रही वार्ताओं में आवश्यक होने पर मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन वह किसी भी देश पर अपनी नीतियां या बातें जबरन नहीं थोपेगा।
”मांगने पर ही देंगे मदद, कूटनीति ही एकमात्र रास्ता”
रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने एक हालिया इंटरव्यू में रूस के रुख को साफ करते हुए कहा:
“रूस इस संघर्ष के समाधान में हर संभव मदद देने के लिए तैयार है, और यह बात इससे जुड़े दोनों पक्षों (अमेरिका और ईरान) को बहुत अच्छे से पता है। इसके साथ ही, हमने कभी भी अपनी सोच किसी पर जबरन नहीं थोपी है और आगे भी ऐसा करने का हमारा कोई इरादा नहीं है। लेकिन, यदि दोनों पक्षों की ओर से इसके लिए उपयुक्त अनुरोध या अपील की जाती है, तो हम मदद का हाथ जरूर बढ़ाएंगे।”
रयाबकोव ने जोर देकर कहा कि मास्को हमेशा से और आज भी “राजनीतिक और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से ही समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध” रहा है। रूस का दृढ़ विश्वास है कि किसी भी तरह के सैन्य एक्शन (सैन्य कार्रवाई) या दबाव आधारित उपायों से कभी भी स्थायी शांति स्थापित नहीं की जा सकती। इसी के साथ उन्होंने अमेरिका और ईरान की ओर से बातचीत की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के प्रयासों का स्वागत भी किया।
पुतिन-जिनपिंग की बीजिंग मीट के बीच आया बयान
रूसी उप विदेश मंत्री का यह बयान बेहद अहम समय पर आया है, जब बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाई-लेवल मीटिंग हुई। इस बैठक में दोनों महाशक्तियों ने मध्य पूर्व के संकट को सुलझाना विश्व शांति के लिए सबसे जरूरी कार्य बताया था।
इसी बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक व्यवस्था को लेकर दुनिया को एक सख्त चेतावनी भी जारी की थी।
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की चेतावनी: “कमजोर पड़ रहे हैं अंतरराष्ट्रीय नियम”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और एकतरफा कार्रवाइयों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था:
अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर खतरा: “अगर यह लड़ाई तुरंत नहीं रुकी, तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और वैश्विक स्थिरता पर इसका बहुत बड़ा और नकारात्मक असर पड़ेगा।”
जंगलराज का डर: उन्होंने आगाह किया कि एकतरफा सैन्य कार्रवाइयां और लंबे समय तक खींचने वाले युद्ध दुनिया को एक ऐसे दौर में ले जा सकते हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय नियम पूरी तरह कमजोर पड़ जाएंगे और दुनिया ‘जंगलराज’ की तरफ बढ़ जाएगी।
बहुध्रुवीय व्यवस्था की मांग: जिनपिंग ने रूस के साथ मिलकर एक नई, अधिक तर्कसंगत और निष्पक्ष वैश्विक प्रणाली बनाने की बात कही, जहां दुनिया में ‘बहुध्रुवीय व्यवस्था’ (Multipolar World) हो और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को चलाने के लिए नए व न्यायसंगत तरीके अपनाए जाएं।
निष्कर्ष:
रूस और चीन के इन बयानों से साफ है कि दोनों देश मध्य पूर्व के संकट और अमेरिका-ईरान के तनाव को वैश्विक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा मान रहे हैं। जहां चीन वैश्विक मंच से युद्ध रोकने की चेतावनी दे रहा है, वहीं रूस ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता (Mediation) के लिए कूटनीतिक दरवाजे खुले रखकर खुद को एक बड़े ग्लोबल प्लेयर के रूप में पेश किया है।
