पुतिन-जिनपिंग की महाबैठक: मध्य पूर्व संकट पर चीन की बड़ी चेतावनी— “जंगलराज की तरफ बढ़ रही है दुनिया, तुरंत रुके युद्ध”
पुतिन-जिनपिंग की महाबैठक: मध्य पूर्व संकट पर चीन की बड़ी चेतावनी— “जंगलराज की तरफ बढ़ रही है दुनिया, तुरंत रुके युद्ध”
बीजिंग: वैश्विक तनाव और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष के बीच बुधवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस महाबैठक में दोनों महाशक्तियों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए 20 ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व और मध्य एशिया के बिगड़े हालातों पर गहरा मंथन किया। इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दुनिया को आगाह करते हुए एक बड़ा बयान दिया है।
”युद्ध और शांति के बीच निर्णायक मोड़ पर दुनिया”
समाचार एजेंसी सिन्हुआ (Xinhua) के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पुतिन के साथ बातचीत में मध्य पूर्व में जारी सभी तरह की शत्रुता और सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत समाप्त करने का पुरजोर आह्वान किया। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र की वर्तमान स्थिति को बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा कि यह समय “युद्ध और शांति के बीच एक निर्णायक मोड़” पर खड़ा है।
बैठक के बाद आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट के युद्ध को लेकर सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा:
”अगर यह लड़ाई तुरंत नहीं रुकी, तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और वैश्विक स्थिरता पर इसका बहुत बड़ा और विनाशकारी असर पड़ेगा। दुनिया एक बार फिर ‘जंगलराज’ की तरफ बढ़ रही है, जहां कानून नहीं बल्कि ताकत का राज होता है।”
जिनपिंग ने आगे कहा कि एकतरफा सैन्य कार्रवाइयां और लंबे समय तक खिंचने वाले युद्ध पूरी दुनिया को एक ऐसे खतरनाक दौर में धकेल सकते हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय नियम पूरी तरह कमजोर और बेअसर हो जाएंगे। इसलिए वैश्विक भलाई के लिए इस लड़ाई को तुरंत रोकना बेहद जरूरी है।
नए वर्ल्ड ऑर्डर (वैश्विक व्यवस्था) की तैयारी
चीन और रूस ने पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को चुनौती देते हुए एक नई और निष्पक्ष वैश्विक प्रणाली बनाने की वकालत की। राष्ट्रपति जिनपिंग ने साझा हितों पर बात करते हुए कहा:
कंधे से कंधा मिलाकर काम: “हम विश्व शासन की एक नई, अधिक तर्कसंगत और निष्पक्ष प्रणाली बनाने तथा दुनिया को समृद्धि की ओर ले जाने के लिए रूस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए तैयार हैं।”
बहुध्रुवीय व्यवस्था: चीन और रूस का मानना है कि दुनिया में किसी एक देश का दबदबा नहीं होना चाहिए, बल्कि एक ‘बहुध्रुवीय व्यवस्था’ (Multipolar World) होनी चाहिए, जहां अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के नए और सम्मानजनक तरीके अपनाए जाएं।
चीन-रूस दोस्ती के ऐतिहासिक मील के पत्थर
बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने रूस और चीन के बीच के मजबूत होते ऐतिहासिक रिश्तों का भी विशेष जिक्र किया। उन्होंने बताया कि:
इस वर्ष चीन-रूस रणनीतिक समन्वय साझेदारी की 30वीं वर्षगांठ है।
साथ ही यह वर्ष ‘चीन-रूस मित्र पड़ोसी और मैत्रीपूर्ण सहयोग संधि’ पर हस्ताक्षर होने की 25वीं वर्षगांठ भी है।
जिनपिंग ने गर्व से कहा कि चीन-रूस संबंध आज इस मुकाम तक ‘कदम दर कदम आगे बढ़कर’ पहुंचे हैं। दोनों देशों ने समय के साथ एक-दूसरे पर राजनीतिक विश्वास और रणनीतिक तालमेल को गहरा किया है। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय न्याय, समानता की रक्षा और मानवता के साझा भविष्य के निर्माण के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
20 अहम समझौतों और डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर
बैठक के समापन पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग ने दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने से जुड़े एक संयुक्त डिक्लेरेशन (घोषणापत्र) पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 20 द्विपक्षीय समझौतों को भी मंजूरी दी गई, जो यह साफ दर्शाता है कि वैश्विक पाबंदियों के बीच रूस और चीन की यह जुगलबंदी आने वाले समय में और मजबूत होने वाली है।
