उत्तराखंड

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन; तीन दिन का राजकीय शोक घोषित, कल बंद रहेंगे सभी स्कूल और दफ्तर

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन; तीन दिन का राजकीय शोक घोषित, कल बंद रहेंगे सभी स्कूल और दफ्तर

​देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय सेना के पूर्व जांबाज अधिकारी भुवन चंद्र खंडूड़ी (B.C. Khanduri) का निधन हो गया है। उनके निधन से पूरे देश और उत्तराखंड राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में उत्तराखंड में तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है। इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है।

​पूर्व मुख्यमंत्री की अंत्येष्टि 20 मई 2026 को पूर्ण पुलिस सम्मान (राजकीय सम्मान) के साथ संपन्न कराई जाएगी। अंत्येष्टि के दिन राज्य भर में विशेष अवकाश रहेगा।

​तीन दिन के राजकीय शोक के नियम और सरकारी आदेश

​शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, तीन दिवसीय राजकीय शोक के दौरान राज्य में निम्नलिखित व्यवस्थाएं प्रभावी रहेंगी:

​राष्ट्रीय ध्वज रहेगा आधा झुका: राजकीय शोक की अवधि के दौरान प्रदेश के समस्त जनपदों में सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) आधा झुका रहेगा।

​शासकीय मनोरंजन पर रोक: इन तीन दिनों के दौरान राज्य में किसी भी प्रकार के शासकीय मनोरंजन (Official Entertainment) के कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जाएगा।

​20 मई को पूर्ण अवकाश: अंत्येष्टि के दिन यानी 20 मई को राज्य सरकार के सभी शासकीय कार्यालय पूरी तरह बंद रहेंगे।

​कल बंद रहेंगे सभी स्कूल और शैक्षणिक संस्थान

​उत्तराखंड के माध्यमिक शिक्षा और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की ओर से सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत 20 मई को राज्य के सभी शासकीय, अशासकीय (सहायता प्राप्त) और निजी शैक्षणिक संस्थान (स्कूल्स और कॉलेज) पूरी तरह बंद रहेंगे। शासन ने सभी संस्थानों को इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।

​सैन्य पराक्रम से सियासत के शीर्ष तक: बीसी खंडूड़ी का जीवन परिचय

​पौड़ी गढ़वाल के मूल निवासी भुवन चंद्र खंडूड़ी का जीवन देश सेवा और शुचिता की राजनीति का एक बेमिसाल उदाहरण रहा है।

​भारतीय सेना में 36 साल की शानदार सेवा

​जन्म: उनका जन्म 1 अक्टूबर 1933 को हुआ था।

​सैन्य करियर: राजनीति में कदम रखने से पहले उन्होंने साल 1954 से लेकर 1990 तक यानी 36 वर्षों तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं।

​1971 का युद्ध: साल 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने बतौर रेजिमेंट कमांडर मोर्चे पर दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे।

​सैन्य सम्मान: देश के प्रति उनकी उत्कृष्ट और समर्पित सेवा के लिए साल 1982 में उन्हें ‘अतिविशिष्ट सेना मेडल’ (AVSM) से सम्मानित किया गया था।

​उच्च शिक्षा: उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय, सैन्य अभियांत्रिकी महाविद्यालय (CME) पुणे, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स (नई दिल्ली) और रक्षा प्रबंध संस्थान (सिकंदराबाद) से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की थी।

​उत्तराखंड के दो बार रहे मुख्यमंत्री

​सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वे सक्रिय राजनीति में आए और 1991 के लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र से सांसद चुने गए। इसके बाद वे लगातार राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे।

​पहला कार्यकाल: वे पहली बार 8 मार्च 2007 से 27 जून 2009 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे।

​दूसरा कार्यकाल: इसके बाद 11 सितंबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के इस्तीफे के बाद उन्होंने एक बार फिर राज्य की कमान संभाली और 2012 तक मुख्यमंत्री पद पर रहे।

​देश की दिग्गज हस्तियों ने जताया गहरा शोक

​भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश के सभी शीर्ष नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है:

​राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी ने उनके निधन को देश के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।

​केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

​विपक्ष ने भी जताया दुख: उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व सीएम हरीश रावत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि खंडूड़ी जी का जाना उत्तराखंड के राजनैतिक और सामाजिक जीवन के एक गौरवशाली अध्याय का अंत है।

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