विभाजन के 79 साल बाद लाहौर में इतिहास पलटा: ‘इस्लामपुरा’ फिर बना ‘कृष्ण नगर’, ‘जैन मंदिर’ और ‘लक्ष्मी चौक’ जैसे पुराने नाम होंगे बहाल
विभाजन के 79 साल बाद, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने लाहौर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को समेटने के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाया है। शहर की पुरानी और विभाजन-पूर्व की साझी विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए सड़कों और इलाकों के आजादी से पहले के हिंदू, सिख और ब्रिटिशकालीन नामों को बहाल करने की बड़ी योजना को मंजूरी दे दी गई है।
विभाजन के 79 साल बाद लाहौर में इतिहास पलटा: ‘इस्लामपुरा’ फिर बना ‘कृष्ण नगर’, ‘जैन मंदिर’ और ‘लक्ष्मी चौक’ जैसे पुराने नाम होंगे बहाल
लाहौर। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने लाहौर शहर की ऐतिहासिक और विभाजन-पूर्व विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने लाहौर की उन तमाम ऐतिहासिक सड़कों, गलियों और चौराहों के पुराने (आजादी से पहले के) नामों को बहाल करने की योजना को मंजूरी दे दी है, जिन्हें पिछले कुछ दशकों में बदल दिया गया था।
विगत वर्षों में विभिन्न सरकारों द्वारा ब्रिटिशकालीन और विशेष रूप से हिंदू व सिख धर्म से जुड़े नामों को बदलकर इस्लामी, पाकिस्तानी या स्थानीय हस्तियों के नाम पर रख दिया गया था। लेकिन अब इस ऐतिहासिक शहर की सांस्कृतिक पहचान को वापस लाने के लिए इन नामों को बदला जा रहा है।
48 घंटों में बदले नाम: ‘इस्लामपुरा’ बना ‘कृष्ण नगर’
पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने सोमवार को जानकारी दी कि इस योजना पर जमीनी स्तर पर काम शुरू हो चुका है। पिछले दो महीनों के भीतर ही नौ प्रमुख जगहों के साइनबोर्ड बदलकर उनके पुराने नाम लिख दिए गए हैं:
कृष्ण नगर की वापसी: ‘इस्लामपुरा’ इलाके का नाम अब आधिकारिक तौर पर बदलकर वापस ‘कृष्ण नगर’ कर दिया गया है।
जैन मंदिर चौक: ‘बाबरी मस्जिद चौक’ का नाम हटाकर उसे फिर से उसका पुराना और ऐतिहासिक नाम ‘जैन मंदिर चौक’ दे दिया गया है।
नवाज शरीफ कर रहे हैं इस विशेष प्रोजेक्ट का नेतृत्व
अधिकारी ने बताया कि कुछ दिन पहले पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में ‘लाहौर विरासत क्षेत्र पुनरुद्धार परियोजना’ के तहत इस योजना को मंजूरी दी गई।
इस पूरी पहल का नेतृत्व पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ खुद कर रहे हैं। उनके इस प्रस्ताव को कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद अब लाहौर के उन प्रमुख इलाकों और सड़कों की सूची तैयार की गई है जिनके पुराने नाम वापस रखे जाएंगे।
इन प्रमुख सड़कों और इलाकों के बदलेंगे नाम:
पिछली सरकारों द्वारा बदले गए जिन ऐतिहासिक नामों को अब वापस बहाल किया जाएगा, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
कृष्ण नगर, संत नगर, धरमपुरा, लक्ष्मी चौक, जैन मंदिर रोड, राम गली, मोहन लाल बाजार, सुंदर दास रोड, भगवान पुरा, शांति नगर, कुम्हारपुरा, क्वींस रोड, जेल रोड, डेविस रोड, लॉरेंस रोड, एम्प्रेस रोड, ब्रैंडरेथ रोड, टेम्पबेल स्ट्रीट और आउटफॉल रोड।
मिंटो पार्क का कायाकल्प: लाला अमरनाथ और गामा पहलवान की यादें होंगी ताजा
नवाज शरीफ ने अपनी योजना में केवल नाम बदलने तक ही सीमित नहीं रखा है, बल्कि उन्होंने ऐतिहासिक मिंटो पार्क (ग्रेटर इकबाल पार्क) में तीन क्रिकेट मैदानों और एक पारंपरिक ‘अखाड़े’ (कुश्ती रिंग) के जीर्णोद्धार का भी प्रस्ताव रखा है।
भाई की गलती की ‘भरपाई’ की रणनीति?
राजनीतिक हलकों में इस कदम को एक ‘नुकसान की भरपाई’ की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, नवाज शरीफ के भाई और पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को साल 2015 में (जब वे पंजाब के मुख्यमंत्री थे) एक शहरी विकास कार्यक्रम के तहत मिंटो पार्क के इन तीन ऐतिहासिक क्रिकेट मैदानों, क्रिकेट क्लबों और एक प्राचीन कुश्ती अखाड़े को ध्वस्त करने के लिए भारी जन-आलोचना और विरोध का सामना करना पड़ा था।
मिंटो पार्क का ऐतिहासिक महत्व
यह पार्क भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के इतिहास और खेल जगत से बेहद गहरा नाता रखता है:
क्रिकेट इतिहास और लाला अमरनाथ: पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक जैसे कई दिग्गज क्रिकेटरों ने मिंटो पार्क के इन क्रिकेट क्लबों में ही अपनी शुरुआती ट्रेनिंग ली थी। देश के विभाजन से पहले, भारतीय क्रिकेट के दिग्गज लाला अमरनाथ भी इसी मैदान पर ट्रेनिंग लेते थे और विभाजन तक ‘क्रिसेंट क्रिकेट क्लब’ की ओर से खेलते थे। जब साल 1978 में अमरनाथ भारतीय टीम के साथ लाहौर के दौरे पर गए, तो वे विशेष रूप से मिंटो पार्क गए थे और इस क्लब के खिलाड़ियों के साथ यादें ताजा की थीं।
दिग्गज पहलवानों की कर्मभूमि: मिंटो पार्क का जो अखाड़ा ध्वस्त कर दिया गया था, वह कभी उपमहाद्वीप के सबसे महान पहलवानों— गामा पहलवान (द ग्रेट गामा), इमाम बख्श और गूंगा पहलवान जैसे महारथियों के दंगल और ऐतिहासिक मुकाबलों का गवाह रहा है।
सांस्कृतिक महत्व: देश के विभाजन से पहले, लाहौर में रहने वाले हिंदू समाज के लोग इसी मिंटो पार्क में हर साल धूमधाम से दशहरा का त्योहार मनाते थे।
निष्कर्ष
पंजाब सरकार की इस पहल को लाहौर के नागरिकों और इतिहासकारों द्वारा सराहा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि मजहबी और सियासी वजहों से इतिहास की जिन कड़ियों को मिटाने की कोशिश की गई थी, इस फैसले से लाहौर को अपनी वो पुरानी और धर्मनिरपेक्ष सांस्कृतिक पहचान वापस मिलेगी, जिसके लिए यह शहर दुनिया भर में मशहूर था।
