अन्तर्राष्ट्रीय

​मिडिल ईस्ट में महायुद्ध टला: ईरान पर मंगलवार को होने वाला बड़ा अमेरिकी हमला रुका, ट्रंप बोले- ‘अरब देशों के नेताओं के कहने पर दी मोहलत’

मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में युद्ध के मुहाने पर खड़े हालात के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा किया है। अमेरिका मंगलवार को ईरान पर एक बड़ा और विनाशकारी सैन्य हमला करने की पूरी तैयारी कर चुका था, जिसे ऐन वक्त पर रोक दिया गया।

​मिडिल ईस्ट में महायुद्ध टला: ईरान पर मंगलवार को होने वाला बड़ा अमेरिकी हमला रुका, ट्रंप बोले- ‘अरब देशों के नेताओं के कहने पर दी मोहलत’

​वाशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर शाम अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर एक सनसनीखेज घोषणा की। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना मंगलवार को ईरान पर एक बड़ा सैन्य हमला करने वाली थी, लेकिन खाड़ी के तीन प्रमुख अरब देशों के शासकों के विशेष अनुरोध और अपील के बाद उन्होंने इस हमले को आखिरी समय पर टालने का निर्देश दिया है।

​राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि भले ही हमला टाल दिया गया है, लेकिन अमेरिकी सेना को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा गया है और ईरान के लिए यह आखिरी मौका है।

​इन तीन बड़े नेताओं के अनुरोध पर टला हमला

​डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर उन दिग्गज नेताओं के नामों का खुलासा किया, जिनकी मध्यस्थता और अपील के बाद युद्ध सचिव (रक्षा मंत्री) को आदेश जारी किए गए। ट्रंप ने लिखा:

​”मुझसे कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान ने व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया कि हम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान पर जो सैन्य हमला करने वाले थे, उसे फिलहाल रोक दिया जाए। यह हमला कल यानी मंगलवार को होना बिल्कुल तय था।”

​मध्यस्थता की रेस से पाकिस्तान गायब!

​इस पूरे घटनाक्रम में एक और दिलचस्प बात यह रही कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पूरे बयान में पाकिस्तान का कहीं कोई जिक्र नहीं किया, जबकि पाकिस्तान लगातार अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाने का दावा करता रहा है।

​’नो न्यूक्लियर वेपन’ की शर्त पर गंभीर बातचीत शुरू

​अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, हमला रोकने के बाद अब पर्दे के पीछे बेहद गंभीर राजनयिक बातचीत (Negotiations) शुरू हो गई है। खाड़ी देशों के इन तीनों बड़े नेताओं का मानना है कि ईरान के साथ एक ऐसा नया समझौता मुमकिन है, जिसे अमेरिका, पश्चिम एशिया और दुनिया के बाकी देशों के लिए स्वीकार करना आसान होगा।

​समझौते की सबसे मुख्य शर्त: ट्रंप ने साफ कर दिया है कि नए समझौते में सबसे बुनियादी और गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) शर्त यह होगी कि ईरान के पास भविष्य में कोई भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapon) नहीं होगा।

​अमेरिकी सेना को निर्देश: “हमले के लिए चौबीसों घंटे रहें तैयार”

​अरब नेताओं के प्रति सम्मान दिखाते हुए ट्रंप ने भले ही ऑपरेशन को रोक दिया है, लेकिन उन्होंने ईरान को खुली चेतावनी भी दी है। ट्रंप ने कहा:

​मैंने युद्ध सचिव (रक्षा मंत्री) पीट हेगसेथ, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डेनियल केन और पूरी अमेरिकी सेना को निर्देश दिया है कि मंगलवार को तय हमला न किया जाए।

​इसके साथ ही मैंने सेना को आदेश दिया है कि अगर ईरान के साथ कोई स्वीकार्य समझौता नहीं होता है, तो वे किसी भी समय ईरान पर बड़े स्तर का हमला (Full-scale Military Attack) करने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

​सिचुएशन रूम में होने वाली थी बड़ी बैठक: Axios का खुलासा

​अमेरिकी समाचार वेबसाइट Axios की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को व्हाइट हाउस के अति-सुरक्षित ‘सिचुएशन रूम’ (Situation Room) में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक हाई-लेवल बैठक करने वाले थे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों को अंतिम रूप देना था।

​मामले से जुड़े दो विश्वसनीय सूत्रों ने Axios को बताया कि अपनी इस सार्वजनिक घोषणा से ठीक पहले ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर और यूएई के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर लंबी बात की थी, जिसके बाद सिचुएशन रूम की रणनीति को बदल दिया गया।

​आगे क्या?

​इस घटनाक्रम के बाद अब दुनिया भर की नजरें ईरान के रुख पर टिकी हैं। यदि ईरान इन शर्तों के साथ समझौते की मेज पर नहीं आता है, तो अमेरिका किसी भी समय उस पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र में तबाही मच सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *