देश से नक्सलवाद का खात्मा, बस्तर में अब बंदूक नहीं विकास का राज: अमित शाह
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ दौरे के आखिरी दिन जगदलपुर में एक अहम प्रेसवार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे, बस्तर के बदलते हालातों और विकास के नए रोडमैप को लेकर कई बड़ी बातें कहीं।
देश से नक्सलवाद का खात्मा, बस्तर में अब बंदूक नहीं विकास का राज: अमित शाह
जगदलपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अपने तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे के अंतिम दिन (19 मई 2026) को जगदलपुर पहुंचे। यहाँ आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता में उन्होंने नक्सलवाद को लेकर देश के सामने एक बड़ा रिपोर्ट कार्ड पेश किया। अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा कि अब बस्तर के हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। यहाँ के लोग डर और बंदूक के साये से बाहर निकलकर विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
इस हाई-प्रोफाइल प्रेसवार्ता में केंद्रीय गृहमंत्री के साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
’नक्सलमुक्त भारत’ की समयसीमा पर बड़ा दावा
गृहमंत्री ने देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने के संकल्प पर बात करते हुए एक बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 24 अगस्त 2024 को आयोजित महानिदेशक (DG) स्तर की बैठक में ‘नक्सलमुक्त भारत’ का एक कड़ा लक्ष्य तय किया गया था। शाह ने दावा किया कि तय रणनीति के तहत 31 मार्च 2026 से पहले ही देश से नक्सलवाद का समूल खात्मा हो चुका है और आज 19 मई 2026 की यह तारीख भी इस ऐतिहासिक सफर में एक बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई है।
सुरक्षाबलों के सर्वोच्च बलिदान को दिया श्रेय
अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ मिली इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय देश के वीर सुरक्षाबलों को दिया। उन्होंने कहा:
”जवानों ने अपने सर्वोच्च बलिदान देकर इस कठिन लड़ाई को उसके मुकाम तक पहुँचाया है। एक नक्सलमुक्त भारत के निर्माण में हमारे सुरक्षा बलों की भूमिका सबसे ऊपर और सबसे अहम रही है।”
कांग्रेस पर साधा निशाना: “लड़ाई में नहीं मिला साथ”
प्रेसवार्ता के दौरान गृहमंत्री ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि देश को नक्सलमुक्त बनाने की इस लंबी और गंभीर लड़ाई में कांग्रेस सरकार ने कभी पूरा सहयोग नहीं दिया। शाह के मुताबिक, अगर पूर्व की सरकारों द्वारा समय रहते सख्त और निर्णायक कदम उठाए गए होते, तो बस्तर और देश के हालात बहुत पहले ही सुधर सकते थे।
’वीर शहीद सेवा डेरा’ बनेगा बस्तर में विकास का नया आधार
नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में विकास की नई बयार लाने के लिए गृहमंत्री ने ‘सेवा डेरा’ योजना की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार सुरक्षा के साथ-साथ अब विकास को सबसे निचले स्तर तक मजबूत करने जा रही है।
सुरक्षा कैंपों का कायाकल्प: पहले चरण में, बस्तर में स्थापित किए गए 200 सुरक्षा कैंपों में से 70 कैंपों को ‘वीर शहीद सेवा डेरा’ में बदला जाएगा।
एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं: इन सेवा डेरों के माध्यम से दूर-दराज के गांवों तक सरकारी योजनाओं को पहुँचाया जाएगा। यहाँ ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूल, आंगनवाड़ी और राशन जैसी तमाम मूलभूत सुविधाएं एक ही जगह मिल सकेंगी।
आदिवासी महिलाओं और डेयरी नेटवर्क से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि ‘सेवा डेरा’ सिर्फ प्रशासनिक और सामाजिक सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे आर्थिक गतिविधियों के एक बड़े केंद्र (Hub) के रूप में विकसित किया जाएगा:
कौशल विकास: स्थानीय आदिवासी महिलाओं को विभिन्न कौशल विकास (Skill Development) कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
NDDB के साथ समझौता: बस्तर में श्वेत क्रांति लाने और डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ एक विशेष समझौता किया गया है।
आय बढ़ाने की मुहिम: इस योजना के तहत स्थानीय आदिवासी परिवारों को गाय और भैंस उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनका दुग्ध व्यवसाय शुरू हो सके और उनकी नियमित आय में बढ़ोतरी हो।
बस्तर में अब खुशहाली का नया दौर
अंत में गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर में अब पूरी तरह से विश्वास का माहौल है। सालों से बंदूकों की गूंज सुनने वाले बस्तर के लोग अब खुशहाली की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, जो न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे हिंदुस्तान के लिए बेहद गर्व और खुशी की बात है।
