दिल्ली-एनसीआर में 3 दिन की चक्काजाम हड़ताल: 21 मई से थमेंगे 10 लाख ट्रकों के पहिये, बढ़ सकती है दूध-सब्जी की किल्लत
दिल्ली-एनसीआर में 3 दिन की चक्काजाम हड़ताल: 21 मई से थमेंगे 10 लाख ट्रकों के पहिये, बढ़ सकती है दूध-सब्जी की किल्लत
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने बढ़े हुए ‘ग्रीन टैक्स’ और सख्त नियमों के विरोध में 21 मई से 23 मई तक तीन दिवसीय देशव्यापी चक्काजाम का ऐलान किया है। ट्रांसपोर्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो इस चक्काजाम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया जाएगा।
इस 3 दिनों की हड़ताल से दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में 10 लाख से ज्यादा भारी वाहनों के पहिये थम जाएंगे, जिससे आवश्यक वस्तुओं जैसे दूध, सब्जी, फल और पानी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
क्यों नाराज हैं ट्रांसपोर्टर्स? (विवाद की मुख्य वजह)
हड़ताल का मुख्य कारण दिल्ली सरकार और CAQM (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) द्वारा भारी वाहनों पर थोपा गया भारी-भरकम पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ECC) यानी ग्रीन टैक्स है।
AIMTC के अध्यक्ष डॉ. हरीश सबरवाल का बयान: “सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन टैक्स केवल उन भारी वाहनों पर लगाने को कहा था जो दिल्ली को सिर्फ एक रास्ते (ट्रांजिट रूट) की तरह इस्तेमाल करते हैं। लेकिन दिल्ली सरकार ने इसे उन ट्रकों पर भी थोप दिया है जो सीधे दिल्ली में माल लेकर आते हैं। हर चक्कर के लिए हमें 2500 से 3 हजार रुपये तक अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं, जिससे धंधा चौपट हो रहा है।”
कितना बढ़ गया है ग्रीन टैक्स?
अप्रैल महीने से लागू की गई नई दरों के तहत कमर्शियल वाहनों पर ग्रीन टैक्स दोगुना तक कर दिया गया है, जिसे हर साल 5% बढ़ाया जाएगा:
हल्के कमर्शियल वाहन और 2 एक्सल ट्रक: ₹1400 से बढ़ाकर ₹2,000 प्रति चक्कर।
3-4 एक्सल और बड़े ट्रक: ₹2600 से बढ़ाकर ₹4,000 प्रति चक्कर।
ट्रांसपोर्टरों की प्रमुख मांगें
यूनियन का कहना है कि वे दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन हैं। लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी। उन्होंने सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
ग्रीन टैक्स की वापसी: दिल्ली आने वाले माल ढुलाई वाहनों पर लगाया गया ECC टैक्स तुरंत वापस हो और इसे सिर्फ ट्रांजिट वाहनों (कॉरिडोर की तरह इस्तेमाल करने वाले) पर ही लागू किया जाए।
BS-4 वाहनों पर से बैन हटे: दिल्ली सरकार द्वारा 1 नवंबर से BS-4 कमर्शियल वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध को वापस लिया जाए। ट्रांसपोर्टरों का सवाल है कि दिल्ली में दौड़ रहीं डीजल की निजी यात्री कारों पर ऐसा बैन क्यों नहीं है?
BS-6 वाहनों को छूट: पर्यावरण मानकों का पालन करने वाले BS-6 ट्रकों को ग्रीन टैक्स से पूरी तरह मुक्त किया जाए।
जरूरी सामानों को राहत: आवश्यक वस्तुएं लाने वाले और खाली वाहनों को लोडिंग के लिए दिल्ली आते समय टैक्स से छूट मिले।
MCD टोल बैरियर खत्म हों: सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए दिल्ली बॉर्डर पर लगे सभी MCD टोल बैरियर हटाए जाएं।
आम जनता पर क्या होगा असर?
यदि यह चक्काजाम 21 मई से शुरू होता है, तो दिल्ली-एनसीआर में आवश्यक वस्तुओं की किल्लत हो सकती है और मालभाड़ा बढ़ने के कारण रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। हालांकि, ट्रांसपोर्ट संघ की परिवहन मंत्रियों से बातचीत हुई है, लेकिन मामला CAQM और दिल्ली सरकार के पाले में होने के कारण अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।
