उत्तराखंड

​धर्मनगरी की मर्यादा पर प्रहार: प्रतिबंधित क्षेत्रों में नॉनवेज डिलीवरी का खुलासा

हरिद्वार की धार्मिक मर्यादा और पवित्रता को अक्षुण्ण रखने के लिए नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्रों में नॉनवेज की डिलीवरी किए जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है।

​धर्मनगरी की मर्यादा पर प्रहार: प्रतिबंधित क्षेत्रों में नॉनवेज डिलीवरी का खुलासा

​हरिद्वार एक विश्वविख्यात धार्मिक नगरी है, जहाँ के अधिसूचित क्षेत्रों में मांस और मदिरा की बिक्री, परिवहन और उपभोग पर पूर्ण प्रतिबंध है। हाल ही में कुछ लोगों द्वारा किए गए एक ‘रिएलिटी चेक’ ने प्रशासन की नींद उड़ा दी। जाँच के दौरान एक ऑनलाइन एप के माध्यम से नॉनवेज ऑर्डर किया गया, जिसकी डिलीवरी महज आधे घंटे के भीतर मायापुर क्षेत्र में गंगा किनारे कर दी गई। इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में भारी रोष है।

​नगर निगम की सख्त कार्रवाई: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी

​गंगा घाटों और संवेदनशील क्षेत्रों में मांसाहारी वस्तुओं की सप्लाई को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम ने संबंधित फूड डिलीवरी कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

​तत्काल रोक के निर्देश: निगम ने प्लेटफॉर्म को गंगा घाटों और प्रतिबंधित क्षेत्रों में मांस-मदिरा की डिलीवरी तुरंत बंद करने का आदेश दिया है।

​अनुपालन रिपोर्ट की मांग: कंपनी के प्रबंधन से कहा गया है कि वे अपने सभी वेंडर्स, रेस्टोरेंट और डिलीवरी पार्टनर्स को इस संबंध में सख्त दिशा-निर्देश जारी करें और इसकी रिपोर्ट निगम को सौंपें।

​नियमों का हवाला: नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि ऐसी गतिविधियां स्थानीय परंपराओं और श्रद्धालुओं की आस्था के विरुद्ध हैं।

​साधु-संतों का आक्रोश: मुकदमा दर्ज करने की मांग

​नगर निगम की नोटिस वाली कार्रवाई से हरिद्वार के साधु-संत संतुष्ट नहीं हैं। संतों ने कंपनी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

​कड़ी कानूनी कार्रवाई: संतों का कहना है कि केवल नोटिस देना काफी नहीं है, धार्मिक भावनाओं को आहत करने के जुर्म में कंपनी पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

​आंदोलन की चेतावनी: साधु-संतों ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही ठोस और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।

​प्रशासनिक रुख: मुख्य नगर आयुक्त का बयान

​मुख्य नगर आयुक्त नंदन कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है। उनका कहना है:

​”हरिद्वार की धार्मिक गरिमा और परंपराओं को बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रतिबंधित क्षेत्रों में मांस और मदिरा की डिलीवरी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। यदि भविष्य में ऐसी कोई भी गतिविधि दोबारा सामने आती है, तो संबंधित प्लेटफॉर्म और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नगर निगम अधिनियम के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”

​निष्कर्ष: यह मामला तकनीक और आस्था के बीच टकराव का एक बड़ा उदाहरण बन गया है। अब देखना यह होगा कि ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियां अपने एल्गोरिदम और सर्विस एरिया में क्या बदलाव करती हैं ताकि भविष्य में धर्मनगरी की मर्यादा का उल्लंघन न हो।

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