राजनीति

केरल: प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस में ‘कलह’, वायनाड की सड़कों पर राहुल-प्रियंका के खिलाफ उतरे लोग

केरल: प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस में ‘कलह’, वायनाड की सड़कों पर राहुल-प्रियंका के खिलाफ उतरे लोग

​वायनाड/तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव 2026 में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के 10 साल के शासन को उखाड़ फेंकने और 102 सीटों के साथ ऐतिहासिक बहुमत हासिल करने के बाद भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) में जश्न का माहौल अब चिंता और आक्रोश में बदल गया है। सत्ता में वापसी के 10 दिन बीत जाने के बाद भी गठबंधन यह तय नहीं कर पाया है कि केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।

​नेतृत्व को लेकर ‘महायुद्ध’: केसी वेणुगोपाल बनाम अन्य

​पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर मचे घमासान ने अब एक खुले विद्रोह का रूप ले लिया है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान के करीबी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल का नाम सीएम पद की रेस में सबसे आगे चल रहा है। खबर है कि उन्हें नवनिर्वाचित विधायकों के बहुमत का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, केरल का एक बड़ा वर्ग और जमीनी कार्यकर्ता वी.डी. सतीशन या रमेश चेन्निथला जैसे स्थानीय चेहरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

​वायनाड में ‘अमेठी’ जैसी हार की चेतावनी

​इस खींचतान का सबसे तीखा असर राहुल गांधी के पूर्व संसदीय क्षेत्र और प्रियंका गांधी के वर्तमान प्रतिनिधित्व वाले वायनाड में देखने को मिला है। वायनाड जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) कार्यालय के पास रातों-रात कई गुमनाम पोस्टर चस्पा किए गए हैं, जिनमें सीधे तौर पर गांधी परिवार को निशाने पर लिया गया है।

​इन पोस्टरों में लिखी कुछ गंभीर चेतावनियाँ:

​”वायनाड दूसरा अमेठी बन जाएगा”: पोस्टरों में राहुल गांधी को 2019 की उनकी ऐतिहासिक हार की याद दिलाते हुए चेतावनी दी गई है कि अगर जनभावनाओं की अनदेखी की गई, तो वायनाड का हश्र भी अमेठी जैसा ही होगा।

​”केरल आपको माफ नहीं करेगा”: अंग्रेजी में लिखे इन पोस्टरों में आरोप लगाया गया है कि राहुल और प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल को केरल की जनता पर “थोप” रहे हैं।

​”बैग उठाने वाला” कहकर तंज: कुछ पोस्टरों में केसी वेणुगोपाल का मजाक उड़ाते हुए उन्हें केवल राहुल गांधी का ‘बैग उठाने वाला’ बताया गया है और कहा गया है कि केरल को एक स्वतंत्र और सशक्त नेतृत्व चाहिए।

​हाईकमान की दुविधा

​विवाद की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि दिल्ली में कई दौर की बैठकों के बाद भी कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सके हैं। एक तरफ विधायकों का गणित वेणुगोपाल के पक्ष में है, तो दूसरी तरफ ‘सड़क पर उतरा जनआक्रोश’ और ‘अमेठी’ जैसी हार की चेतावनी ने हाईकमान के हाथ-पांव फुला दिए हैं।

​”केसी आपके अपने आदमी हो सकते हैं, लेकिन केरल के लिए नहीं। सिर्फ चुनाव जीतने के लिए वायनाड मत आइए, वरना यहां से दोबारा कभी नहीं जीत पाएंगे।” — वायनाड में लगे एक पोस्टर का अंश

​फिलहाल, किसी भी गुट ने इन पोस्टरों की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन वायनाड जैसे सुरक्षित गढ़ में इस तरह का विद्रोह कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। क्या कांग्रेस अपनी इस ऐतिहासिक जीत को आंतरिक गुटबाजी की भेंट चढ़ा देगी, या आलाकमान जनभावनाओं के आगे झुकेगा? केरल की नजरें अब दिल्ली से होने वाले अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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