उत्तराखंड: कल से शुरू होगा जनगणना 2027 का प्रथम चरण, डिजिटल माध्यम से होगी मकानों की गणना
उत्तराखंड में आगामी जनगणना 2027 के प्रथम चरण की तैयारियों और प्रक्रिया को लेकर यहाँ एक विस्तृत समाचार रिपोर्ट दी गई है:
उत्तराखंड: कल से शुरू होगा जनगणना 2027 का प्रथम चरण, डिजिटल माध्यम से होगी मकानों की गणना
देहरादून: उत्तराखंड में जनगणना 2027 के महाअभियान का शंखनाद होने जा रहा है। कल यानी 25 अप्रैल 2026 से प्रदेश भर में मकान सूचीकरण (House Listing) और मकान गणना का कार्य शुरू होगा, जो 24 मई तक चलेगा। इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक है क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल होगी।
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
अवधि: 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक।
प्रक्रिया: शत-प्रतिशत डिजिटल (मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से)।
सवाल: प्रगणक घर-घर जाकर कुल 33 सवालों के जवाब मांगेंगे।

हेल्पलाइन: किसी भी शंका या समस्या के लिए टोल-फ्री नंबर 1855 (सुबह 9 से शाम 5 बजे) जारी किया गया है।
स्व-गणना (Self Enumeration) को मिला भारी समर्थन
जनगणना से पहले जनता को अपनी जानकारी स्वयं भरने का विकल्प दिया गया था, जिसकी अवधि आज 24 अप्रैल को समाप्त हो गई।
प्रदेश भर में कुल 62,626 परिवारों ने स्व-गणना पोर्टल का उपयोग किया।
सर्वाधिक भागीदारी देहरादून (10,884) और नैनीताल (9,211) जिलों में देखी गई।
फायदा: जिन परिवारों ने स्व-गणना की है, उन्हें प्रगणक को केवल अपनी SE ID देनी होगी, जिससे उनकी जानकारी स्वतः डाउनलोड हो जाएगी।
डिजिटल जनगणना: तकनीक का समन्वय
यह भारत की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना है। पहली बार आंकड़ों को रजिस्टर के बजाय सीधे मोबाइल ऐप पर भरा जाएगा।
CMMS पोर्टल: गणना के प्रबंधन और निगरानी के लिए ‘जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली’ का उपयोग किया जा रहा है।
प्रगणक: कुल 20,859 प्रगणक और 3,670 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं।
आईडी कार्ड: सुरक्षा के लिहाज से सभी प्रगणकों के पास आधिकारिक पहचान पत्र होगा।
जिलों और नगर निगमों की स्थिति
प्रशासनिक सुविधा के लिए राज्य को 29,567 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स (HLB) में बांटा गया है।
पौड़ी जिला: सर्वाधिक 3,501 ब्लॉक्स के साथ सबसे विस्तृत क्षेत्र।
देहरादून नगर निगम: नगर निगम क्षेत्रों में सबसे अधिक 1,948 ब्लॉक्स बनाए गए हैं।
जिम्मेदारी: जिलों में जिलाधिकारी और नगर निगमों में नगर आयुक्त को प्रमुख जनगणना अधिकारी बनाया गया है।
जनता के लिए महत्वपूर्ण निर्देश
जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि:
दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं: किसी भी आईडी या दस्तावेज की भौतिक प्रति दिखाने की जरूरत नहीं है, मुखिया द्वारा दी गई जानकारी ही मान्य होगी।
कोई ओटीपी (OTP) नहीं: जनगणना की प्रक्रिया के दौरान प्रगणक द्वारा कोई ओटीपी नहीं मांगा जाएगा। मोबाइल नंबर केवल भविष्य में संपर्क हेतु लिया जा रहा है।
सही जानकारी: चूंकि यह डेटा विकास योजनाओं के निर्माण में सहायक होता है, अतः जनता से सटीक जानकारी देने की अपील की गई है।
ऐतिहासिक संदर्भ
भारत में पहली जनगणना 1872 में हुई थी और आजादी के बाद पहली बार 1951 में। वर्ष 2021 की जनगणना कोरोना महामारी के कारण स्थगित हो गई थी, जो अब 2027 में संपन्न होने जा रही है। इस बार की जनगणना में जातिगत गणना भी शामिल की गई है।
नोट: एक प्रगणक को औसतन 150 से 200 घरों की जिम्मेदारी दी गई है, जिन्हें उन्हें एक माह के भीतर पूरा करना होगा।
