रामनगर: तराई पश्चिमी में बाघों पर गहराया संकट, एक हफ्ते में चौथी घटना से हड़कंप
रामनगर: तराई पश्चिमी में बाघों पर गहराया संकट, एक हफ्ते में चौथी घटना से हड़कंप
रामनगर (नैनीताल): उत्तराखंड के रामनगर स्थित तराई पश्चिमी वन प्रभाग में बाघों की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक स्थिति पैदा हो गई है। पिछले एक हफ्ते के भीतर बाघों से जुड़ी चार बड़ी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें एक बाघ की मौत और तीन बाघों का रेस्क्यू शामिल है। ताजा मामले में एक बाघिन ‘हीट स्ट्रोक’ (लू) और डिहाइड्रेशन के कारण जिंदगी की जंग लड़ रही है।
भीषण गर्मी का शिकार हुई बाघिन
बुधवार देर शाम बैलपड़ाव रेंज के गैबुआ क्षेत्र में वन विभाग ने एक बीमार बाघिन का रेस्क्यू किया। गश्त के दौरान वनकर्मियों ने देखा कि बाघिन बेहद कमजोर और घायल अवस्था में पड़ी है।
108 डिग्री बुखार: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डॉक्टरों ने बताया कि रेस्क्यू के समय बाघिन का शरीर 108 डिग्री फारेनहाइट तापमान पर तप रहा था।
नाजुक हालत: अत्यधिक गर्मी और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के कारण बाघिन की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे ढेला रेस्क्यू सेंटर में ड्रिप और विशेष दवाओं पर रखा गया है।
एक हफ्ते की घटनाओं का ब्योरा
12 अप्रैल: बन्नाखेड़ा रेंज में एक 13 वर्षीय नर बाघ मृत मिला। जांच में मौत का कारण प्राकृतिक बताया गया।
13 अप्रैल: फाटो ज़ोन से एक घायल बाघिन का रेस्क्यू किया गया, जिसका उपचार जंगल में ही किया गया।
14 अप्रैल: बैलपड़ाव रेंज में एक 7-8 वर्षीय नर बाघ घायल मिला। आपसी संघर्ष के कारण उसके शरीर और गर्दन पर गहरे घाव थे, जिनमें संक्रमण फैल चुका था।
15 अप्रैल: गैबुआ क्षेत्र में हीट स्ट्रोक से पीड़ित बाघिन का रेस्क्यू।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
वन विभाग के कुमाऊं चीफ डॉ. साकेत बडोला के अनुसार, बाघों के आपसी संघर्ष और बढ़ती गर्मी ने चुनौतियों को बढ़ा दिया है। अप्रैल के महीने में ही तापमान का तेजी से बढ़ना वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है।
फिलहाल, वन विभाग की मेडिकल टीम रेस्क्यू सेंटर में भर्ती बाघों की 24 घंटे निगरानी कर रही है। विभाग का कहना है कि पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही इन्हें वापस जंगल में छोड़ा जाएगा।
मुख्य बिंदु:
क्षेत्र: तराई पश्चिमी वन प्रभाग, रामनगर।
बड़ा खतरा: भीषण गर्मी और आपसी संघर्ष।
प्रशासनिक एक्शन: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की मेडिकल टीम द्वारा रेस्क्यू और उपचार जारी।
