AAP सांसद अशोक मित्तल के यहां ED के छापे, राघव चड्ढा की जगह बने थे डिप्टी लीडर
AAP सांसद अशोक मित्तल के यहां ED के छापे, राघव चड्ढा की जगह बने थे डिप्टी लीडर
नई दिल्ली/जालंधर: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद और हाल ही में पार्टी के राज्यसभा डिप्टी लीडर बने डॉ. अशोक कुमार मित्तल (Ashok Kumar Mittal) के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (15 अप्रैल 2026) को बड़े पैमाने पर छापेमारी की। ED की टीमें जालंधर, फगवाड़ा (पंजाब) और गुरुग्राम समेत कई जगहों पर पहुंचीं। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) उल्लंघन के मामले में चल रही जांच का हिस्सा है।
छापे लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) और लवली ग्रुप की संपत्तियों पर भी पड़े, जिनके मालिक/चांसलर अशोक मित्तल हैं। ED ने उनके आवास, ऑफिस, यूनिवर्सिटी कैंपस और परिवार के अन्य परिसरों में तलाशी ली। अभी तक ED ने इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
अशोक मित्तल कौन हैं?
अशोक कुमार मित्तल लवली ग्रुप के संस्थापक और LPU (फगवाड़ा, पंजाब) के चांसलर हैं।
वे पंजाब से AAP के राज्यसभा सांसद हैं (अप्रैल 2022 से)।
हाल ही में (2 अप्रैल 2026) AAP ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर बना दिया था। उन्होंने राघव चड्ढा की जगह ली थी।
मित्तल शिक्षा क्षेत्र के बड़े नाम माने जाते हैं और उनकी संपत्ति करोड़ों में बताई जाती है।
राघव चड्ढा की जगह डिप्टी लीडर बने थे
AAP ने राज्यसभा में बड़े नेतृत्व बदलाव के तहत राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटा दिया था। उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। मित्तल ने खुद कहा था कि यह पार्टी की सामान्य प्रक्रिया है और राघव चड्ढा ने सबसे पहले उन्हें बधाई दी थी। इस बदलाव के कुछ दिनों बाद ही ED का यह एक्शन सामने आया है।
AAP का बयान
AAP ने छापों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। पार्टी का आरोप है कि यह पंजाब विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच BJP की साजिश है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे “मोदी स्टाइल” बताया और कहा कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों पर दबाव बनाने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।
क्या है मामला?
ED की जांच FEMA उल्लंघन से जुड़ी है, जिसमें विदेशी मुद्रा और वित्तीय लेन-देन की अनियमितताएं शामिल बताई जा रही हैं।
छापे सुबह से शुरू हुए और कई घंटों तक चले। टीमों ने दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य सामग्री जब्त की हो सकती है।
यह कार्रवाई लवली ग्रुप की कंपनियों और मित्तल परिवार से जुड़े परिसरों पर केंद्रित रही।
यह घटनाक्रम AAP के अंदरूनी बदलावों और केंद्र की एजेंसियों के एक्शन के बीच की चर्चा को फिर तेज कर रहा है। AAP लगातार कह रही है कि ऐसे छापे चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं, जबकि विपक्षी दलों पर एक्शन को “कानून का राज” बताया जा रहा है।
जांच अभी जारी है। ED की तरफ से आगे क्या खुलासा होता है, यह देखना बाकी है। क्या लगता है आपको — यह सामान्य जांच है या राजनीतिक? कमेंट में बताएं!
