उत्तराखंड की राजनीति में ‘हरदा’ की वापसी: 15 दिनों का राजनीतिक अवकाश समाप्त, अब आर-पार की तैयारी?
उत्तराखंड की राजनीति में ‘हरदा’ की वापसी: 15 दिनों का राजनीतिक अवकाश समाप्त, अब आर-पार की तैयारी?
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत का 15 दिवसीय ‘अर्जित अवकाश’ आज शुक्रवार को समाप्त हो गया है। राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी माने जाने वाले रावत अब आधिकारिक तौर पर सियासत के मैदान में लौट आए हैं। उनके इस अवकाश ने न केवल कांग्रेस के भीतर खलबली मचा दी थी, बल्कि उत्तराखंड के सियासी गलियारों में कई नई चर्चाओं को भी जन्म दे दिया है।
नाराजगी या रणनीति? अवकाश के पीछे की कहानी
विवाद की शुरुआत 28 मार्च को हुई थी, जब देहरादून में कांग्रेस मुख्यालय में 6 बड़े नेताओं की जॉइनिंग हुई। बताया जा रहा है कि हरीश रावत अपने करीबी रामनगर के नेता संजय नेगी की जॉइनिंग न होने से बेहद खफा थे। इसी नाराजगी को आधार बनाकर उन्होंने 15 दिनों के ‘राजनीतिक अवकाश’ की घोषणा कर सबको चौंका दिया था।
छुट्टी पर रहकर भी रहे ‘सुपर एक्टिव’
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह अवकाश महज एक नाम था, असल में यह रावत का शक्ति प्रदर्शन था।
जनसंपर्क का रिकॉर्ड: 77 वर्ष की आयु में भी रावत ने इन 15 दिनों में रोजाना 8 से 10 कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
मीडिया का केंद्र: अवकाश के दौरान वे चर्चाओं से ओझल होने के बजाय केंद्र बिंदु बने रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता से पार्टी हाईकमान और प्रदेश नेतृत्व को बैकफुट पर धकेल दिया।
नेताओं का तांता: प्रीतम सिंह से लेकर कैबिनेट मंत्रियों तक की उनसे मुलाकात ने राजनीतिक तापमान को बढ़ाए रखा।
विरोधियों और ‘कंडाली’ लगाने वालों पर तीखा प्रहार
अपने अवकाश के अंतिम दिन रावत ने सोशल मीडिया पर विरोधियों को निशाने पर लिया। उन्होंने उन लोगों पर तंज कसा जो उनके भाजपा में जाने की अफवाहें उड़ा रहे थे। रावत ने लिखा:
”राजनीति के विपरीत ध्रुवों से जुड़े लोग मेरे अवकाश पर लठ्ठ बरसा रहे हैं। मेरे एक दोस्त मुझे कंडाली घास (बिच्छू घास) के छपके लगाने का सुझाव दे रहे हैं।”
क्या होगी अगली चाल?
आज से हरीश रावत की वापसी ऐसे समय में हुई है जब कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा 5 दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर हैं।
अब सबकी निगाहें इन सवालों पर टिकी हैं:
क्या कुमारी शैलजा और संगठन रावत की मांग मानकर संजय नेगी की जॉइनिंग करवाएंगे?
क्या 2027 के चुनावों से पहले हरीश रावत ने अपनी ‘अनिवार्यता’ सिद्ध कर दी है?
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और रावत गुट के बीच की खाई कैसे भरेगी?
फिलहाल, ‘हरदा’ की पिच पर वापसी ने विरोधियों और समर्थकों, दोनों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। आज से शुरू होने वाला उनका नया राजनीतिक अध्याय उत्तराखंड कांग्रेस की भविष्य की दिशा तय करेगा।
