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​मिडल ईस्ट संकट: 24 घंटे में तार-तार हुआ सीजफायर, क्या फिर भड़केगी ‘महाजंग’?

मिडल ईस्ट में शांति की उम्मीदें एक बार फिर धूमिल होती नजर आ रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जिस 2-हफ्ते के सीजफायर (युद्धविराम) का ऐलान बड़ी उम्मीदों के साथ किया गया था, वह 24 घंटे के भीतर ही खतरों के घेरे में आ गया है।

​ताजा अपडेट के अनुसार, इजरायल ने लेबनान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला शुरू कर दिया है, जिसे ‘ऑपरेशन इटरनल डार्कनेस’ (Operation Eternal Darkness) नाम दिया गया है। यहाँ इस तनावपूर्ण स्थिति की पूरी जानकारी दी गई है:

​मिडल ईस्ट संकट: 24 घंटे में तार-तार हुआ सीजफायर, क्या फिर भड़केगी ‘महाजंग’?

​1. इजरायल का लेबनान पर भीषण हमला

​बुधवार, 8 अप्रैल 2026 को सीजफायर की घोषणा के महज कुछ घंटों बाद, इजरायली वायुसेना ने लेबनान में 100 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी की।

​भारी तबाही: इन हमलों में अब तक कम से कम 254 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हैं।

​बेरूत पर निशाना: इजरायल ने बिना किसी चेतावनी के बेरूत के रिहायशी और कमर्शियल इलाकों को निशाना बनाया।

​इजरायल का तर्क: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका-ईरान के बीच हुआ सीजफायर समझौता लेबनान या हिजबुल्लाह पर लागू नहीं होता।

​2. अमेरिका और ईरान के बीच ‘गलतफहमी’ या जिद?

​सीजफायर को लेकर अमेरिका और ईरान के बयानों में जमीन-आसमान का अंतर है:

​ईरान का दावा: पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए इस समझौते में ईरान और उसके सहयोगियों (लेबनान सहित) को शामिल माना गया था। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह इजरायली हमलों के खिलाफ “निवारक अभियान” (Deterrent operations) शुरू कर सकता है।

​अमेरिका का रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ किया है कि लेबनान इस डील का हिस्सा नहीं है। वेंस ने इसे ईरान की एक “तार्किक गलतफहमी” करार दिया है।

​3. तनाव के नए केंद्र: होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी देश

​युद्ध की आग अब अन्य क्षेत्रों में भी फैल रही है:

​तेल की सप्लाई ठप: इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों की आवाजाही को फिर से रोक दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है।

​मिसाइल हमले: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई 17 बैलिस्टिक मिसाइलों और 35 ड्रोनों को मार गिराया है। सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन पर भी हमले की खबरें हैं।

​4. संयुक्त राष्ट्र की चिंता

​यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने लेबनान में हो रहे नरसंहार की निंदा करते हुए इसे “भयानक” बताया है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सीजफायर के तुरंत बाद इस तरह की हिंसा शांति की नाजुक कोशिशों को पूरी तरह खत्म कर सकती है।

​निष्कर्ष: क्या होगा आगे?

​मिडल ईस्ट इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है। एक तरफ जहाँ अमेरिका इसे “सही दिशा में कदम” बता रहा है, वहीं जमीन पर बढ़ती हिंसा और ईरान की जवाबी कार्रवाई की तैयारी यह संकेत दे रही है कि यह युद्धविराम केवल कागजों तक ही सीमित रह सकता है। यदि अगले कुछ घंटों में कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए, तो यह संघर्ष एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।

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