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​ईरान-अमेरिका सीजफायर: भारत ने किया स्वागत, ‘होर्मुज’ से व्यापारिक जहाजों की वापसी का रास्ता साफ

भारत और अमेरिका-ईरान के बीच हुए हालिया घटनाक्रम पर आपकी रिपोर्ट काफी विस्तृत है। विदेश मंत्रालय का यह बयान न केवल कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ी राहत लेकर आया है।

​ईरान-अमेरिका सीजफायर: भारत ने किया स्वागत, ‘होर्मुज’ से व्यापारिक जहाजों की वापसी का रास्ता साफ

​नई दिल्ली/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक संघर्ष-विराम (Ceasefire) के बाद भारत सरकार ने अपनी पहली प्रतिक्रिया साझा की है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस कदम का पुरजोर समर्थन किया और इसे पश्चिम एशिया में ‘स्थायी शांति’ की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

​भारत के लिए क्यों जरूरी है यह सीजफायर?

​विदेश मंत्रालय ने तनाव कम करने, बातचीत और कूटनीति पर जोर देते हुए दो मुख्य चिंताओं को उजागर किया है:

​वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति: इस संघर्ष ने वैश्विक तेल और ऊर्जा नेटवर्क को बुरी तरह प्रभावित किया था।

​व्यापारिक स्वतंत्रता: भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में नौवहन की अबाध स्वतंत्रता और वैश्विक वाणिज्य के सुचारू प्रवाह की उम्मीद जताई है।

​फंसे हुए भारतीय नाविकों को मिली राहत

​फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों और नाविकों के लिए यह खबर किसी वरदान से कम नहीं है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

​कुल जहाज: फारस की खाड़ी में भारत के 16 जहाज लंगर डाले खड़े थे।

​नाविकों की संख्या: इन जहाजों पर कुल 433 भारतीय नाविक फंसे हुए थे।

​वापसी का समय: रास्ता खुलने के बाद अब ये जहाज भारत के लिए कूच करेंगे। इन्हें वापस पहुंचने में 3 दिन से लेकर एक सप्ताह तक का समय लग सकता है।

​डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान और पाकिस्तान की भूमिका

​अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी निर्धारित डेडलाइन से करीब 90 मिनट पहले सोशल मीडिया पर इस सीजफायर की घोषणा की। इस घोषणा के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

​दो हफ्ते की मोहलत: विवादित मुद्दों पर सहमति बन गई है और अगले 14 दिनों में समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा।

​होर्मुज स्ट्रेट का खुलना: ट्रंप ने दावा किया कि ईरान होर्मुज का रास्ता खोलने को तैयार है। रोचक बात यह है कि ट्रंप के अनुसार, यह भरोसा उन्हें पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के माध्यम से मिला है।

​ईरान का 10 सूत्रीय प्रस्ताव: अमेरिका को ईरान की ओर से 10 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिसे ट्रंप ने बातचीत का ‘व्यवहारिक आधार’ बताया है।

​निष्कर्ष: अमेरिका का कहना है कि उसने अपने सैन्य उद्देश्य प्राप्त कर लिए हैं। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह दो सप्ताह की प्रक्रिया पश्चिम एशिया में दशकों पुराने तनाव को खत्म कर पाएगी या नहीं। भारत के लिए अपने 433 नाविकों की सुरक्षित वापसी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

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